जब देश की गरीब जनता ने सेना के लिए दान में दिए 50 करोड़ रुपए

इतिहास कहता है कि जब-जब भारत पर कोई विपदा आई, तब-तब देश की जनता ने तन-मन-धन से सहयोग दिया। और ये सहयोग गरीबी की उस हालत में भी कम नहीं हुआ, जब देश की अधिसंख्य जनता के पास दो वक्त का भरपेट भोजन तक नहीं हुआ करता था।

ऐसे बुरे वक्त में भी लोगों ने देश की सेना को मदद देने के लिए देखते-देखते 50 करोड़ रुपए इकट्‌ठा कर दिए थे। तब 50 करोड़ की कीमत आज के अरबों रुपए के बराबर थी।

किस्सा सन्‌ 1962 का है, जब चीन ने छद्‌म नीति अपनाते हुए भारत पर हमला कर दिया था। भारत की सेना का मनोबल तो तब बहुत ऊंचा था, लेकिन दिल्ली में बैठी तत्कालीन सरकार की ढुलमुल नीति व अस्पष्ट निर्देशों के चलते युद्ध के मैदान में डटे सैनिकों के पास पर्याप्त संसाधन ही नहीं पहुंच सके। नतीजतन, चीन हमारे सैनिकों पर हावी होने लगा। इससे देश की जनता का खून खौल उठा और लोग सेना की मदद करने को प्राणपण से तैयार हो गए।

इसी दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सेना को संसाधन देने के लिए देशवासियों से आर्थिक सहयोग देने की अपील की। अपील होते ही देश की गरीब और भूख से पीड़ित जनता ने भी राष्ट्रीय कोष में चंद दिनों में 50 करोड़ रुपए का धन जमा करवा दिया। यह देशभक्ति देख तब नेहरू भी हतप्रभ रह गए थे। बाद में इस राशि से सेना को भरपूर सहयोग दिया गया।

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