भारत के आसमान की हिफाजत करने में सक्षम नहीं तेजस-Air force

भारतीय वायु सेना ने सरकार से कहा है कि स्वदेश निर्मित हल्का लड़ाकू विमान तेजस अब भारतीय आसमान की सुरक्षा करने में नाकाम है।

4 दशक का इंतजार बेकार?

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया है कि वायु सेना का यह जवाब तब आया है, जब रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना से सिंगल इंजन वाले लड़ाकू विमान के अधिग्रहण की योजना को खारिज करने को कहा था। मंत्रालय को दिए जवाब में वायु सेना ने लिखा है कि तेजस लड़ाकू विमान स्वीडिश एयरोस्पेस कंपनी साब द्वारा निर्मित लड़ाकू विमान JAS 39 ग्रीपेन और अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन निर्मित F-16 की तुलना में काफी पीछे है।

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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने ही यह फर्क समझते हुए इस मुद्दे को उठाया था जिसके बाद सरकार की तरफ से वायु सेना को कहा गया था कि विदेश निर्मित सिंगल इंजन के लड़ाकू विमान को बेड़े में शामिल करने की योजना खारिज कर सिर्फ स्वदेश निर्मित सिंगल इंजन वाले लड़ाकू विमान को शामिल किया जाय। सूत्रों के मुताबिक हाल ही में वायु सेना ने सरकार के सामने एक प्रेजेंटेशन दिया है जिसमें यह बताया गया है कि तेजस कैसे अकेले भारतीय आसमान की हिफाजत नहीं कर सकता है।

वायु सेना के मुताबिक, संघर्ष की स्थिति में तेजस सिर्फ 59 मिनट तक मैदान में डटे रह सकता है जबकि ग्रीपेन तीन घंटे और एफ-16 करीब चार घंटे तक संघर्ष कर सकता है। इसके अलावा तेजस सिर्फ तीन टन का भार ढो सकता है जबकि ग्रीपेन छह टन और एफ-16 सात टन का भार ढोने में सक्षम है। यानी किसी निशाने पर 36 बम गिराने के लिए छह तेजस की जरूरत पड़ेगी जबकि ग्रीपेन और एफ-16 की तीन इकाई ही इस काम को अंजाम तक पहुंचा सकती है। इसके अलावा तेजस का रख-रखाव भी उन दोनों की तुलना में काफी महंगा है। सूत्रों के मुताबिक, तेजस 20 साल तक कारगर रह सकता है जबकि वे दोनों विमान 40 साल तक अच्छे से काम कर सकते हैं। कुछ मामलों में तो रूसी मिग-21 भी तेजस से अच्छा है।

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