केश गये और मैं कैशलेस हो गया!

नोटबंदी वो शब्द हो गया जो गूगल सर्च में पिछले 1 साल से नंबर वन बना है। जहां सिर्फ नो लिखते ही गूगल समझ लेता है कि लिखने वाला क्या चाहता है। अब जबकि देश के इस फैसले को आज पूरा एक वर्ष हो गया एक बार फिर से एक गुट की ओर से नेगेटिव प्रचार में पूरी तन्मयता दिख रही है, तो दूसरे गुट की ओर से पॉज़ीटिव सियापा निरंतरता पाये हुए है।

 

यानी फायदों के आंकड़े दर आंकड़े पेश किए जा रहे हैं। मैं भी सोचता रहा इसके बारे में, पर लगा कि इसमें पीछे क्यों रहूं? बीते दो दशकों तक एक-एक मेगाबाइट डेटा को तरसता हुआ, महंगे डेटा के उपयोग में पूरी तरह कंजूसी बरतता हुआ दिन बिता रहा था। और अब तो मानों चहुंओर से धूल की तरह सस्ते डेटा की बरसात हो रही हो। तो फिर सोशल मीडिया के कलह में हर किसी को अपना योगदान देने का फर्ज तो बनता ही है। वरना भाई लोग तटस्थता का संज्ञेय अपराध समझ कर मुझे भी अपराधी बना डालेंगे।

हालांकि नोटबंदी, जीडीपी और आर्थिक विकास पर किसी भी पॉजटिव और निगेटिव एंगल वाले बड़े-बड़े ज्ञानियों का पूरे साल पाला पड़ता ही रहा। ज्ञान बघारने वाले भले ही अर्थशास्त्र न पढ़े हों किन्तु इनके तर्क-वितर्क देख कर आर्थिक विशेषज्ञों की भी बोलती बंद हो जायें। वैसे हमारे देश मे सिर्फ अर्थशास्त्री ही क्यों किसी भी विषय पर ज्ञानवान लोगों की कोई कमी नहीं है। यहां तो केवल तर्क शक्ति होनी चाहिए। मंच माइक और मंचासीन होने का तजुर्बा होना चाहिये। बाकी चीजें तो स्वमेव ही उतपन्न हो जातीं हैं।

वैसे ज्ञानियों की इस कतार से मैं भी अछूता नहीं हूं। लिहाजा ज्ञानी होने या बनने की आवश्यकता के साथ अपनी खुद की बात थोड़ी विनम्रता से तो कह ही सकता हूं। नोटबंदी ने देश के जीडीपी और आर्थिक विकास का कबाड़ा किया हो या आगे बढ़ाया हो, इससे मुझे क्या, मैं तो बस अपनी बात कहता हूं। इसने मुझे खूब सारा फायदा पहुंचाया, सच्ची मुच्ची का। नोटबंदी ने मुझे कैशलेस जीना सिखाया। साथ ही सिर पर केश की कमी से तेल कंघी की उम्र भी बढ़ गई। जब अचानक नोटबंदी हुई तो जेब में रखा नोट महज कागज का टुकड़ा रह गया।

बैंकों की लंबी लाइन में लगने की हिम्मत नहीं हुई सो कोई महीने भर तक मैं कैशलेस रहा और इस तरह कैशलेस जीना सीख गया। नोटबंदी ने मुझे न्यूनतम आवश्यकताओं के बीच संतोष पूर्ण जीना सिखाया। कोई महीने भर मेरे बटुए में महज कागज के टुकड़े रहे। गुल्लक में कुछ सिक्के थे जिनके दम पर मैंने पूरा महीना निकाला। न कोई विलासिता की वस्तु उदाहरण प्याज-टमाटर जैसी चीजों की खरीदारी की न किसी तरह की इच्छा-अपेक्षा रखी। इच्छा हुई तो भी मन में संतोष कर लिया, सांत्वना दे दी। बड़ा ही शांति पूर्ण, संतोष पूर्ण जीवन बना रहा। आगे किसी भी कठिन समय को झेल लेने की बड़ी ताकत मिली।

अभी तक सिर्फ पेटी सुनी थी अब पेटीएम भी सीख लिया। अंततः जब पानी सिर से ऊपर बहने लगा तो जुगाड़ कर, पूछ-पाछ कर, लोगों, गुरुओं, एक्सपर्टों की लल्लो-चप्पो कर और घंटों यू ट्यूब ट्यूटोरियल वीडियो देख-सुन कर इसे इंस्टाल करना, इंस्टाल करने के बाद खाता बनाना और खाता बनाने के बाद सफलता पूर्वक भुगतान करना सीख गया।

धन्यवाद नोटबंदी, तूने मुझे तकनीकी जानकार बना दिया। नोटबंदी ने मेरा स्वास्थ्य ठीक किया। नोटबंदी के बाद बार-बार बैंक के चक्कर लगाने, एटीएम दर एटीएम भटकने से आउटिंग हुई, कसरत हुई और इस वजह से मेरा शुगर लेवल डाउन हुआ। हार्ट रेट ठीक हुआ, शरीर में चुस्ती फुर्ती आई, पेट की चरबी कम हुई और इस तरह कुल-मिलाकर मेरा स्वास्थ्य पहले की अपेक्षा बहुत अच्छा हो गया।

कहना अतिश्योक्ति नहीं कि इसी ने मुझे मुखर बनाया, मेरी शर्म हया दूर की। राह चलते लोगों से बेझिझक चालू एटीएम के बारे में पूछताछ करने लगा एटीएम की लाइनों में अपने आगे पीछे लगे लोगों की कहानियां सुनीं कम और अपनी सुनाई ज्यादा। बड़ा अच्छा अनुभव रहा। सीखें मिलीं अलग से जैसे कि कुछ परिचितों के नोट बदलवाने के स्पष्ट और अस्पष्ट आग्रह को यथा योग्य विनम्रतापूर्वक और कठोरतापूर्वक ठुकराने की कला भी सीखी। शिद्दत से नोटबंदी सीजन 2 का इंतजार कर रहा हूं। जीडीपी और आर्थिक विकास आप अपने पास रखो, मुझे पहले से भी अधिक फायदा होगा ऐसी पूरी उम्मीद है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *