भावान्तर भुगतान योजना  से किसानों  वंचित  हुए तो अफसरों की जिम्मेदारी होगी

जबलपुर। कलेक्टर महेशचन्द्र चौधरी ने चेतावनी दी है कि लापरवाही के चलते मुख्यमंत्री भावान्तर भुगतान योजना के लाभ से किसानों के वंचित होने पर सम्बन्धित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इस सिलसिले में उन्होंने खास तौर पर खाद्य नियंत्रक, सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं, उप संचालक कृषि, प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम और मण्डी सचिव को आगाह किया है।  श्री चौधरी ने प्रबंध संचालक मण्डी बोर्ड से चर्चा का हवाला देते हुए कहा कि अन्य जिलों के पंजीकृत किसान भी भावान्तर योजनान्तर्गत जबलपुर जिले की मण्डियों में अपनी उपज की बिक्री कर सकते हैं। उन्हें समान रूप से भावान्तर योजना का लाभ प्राप्त होगा।

उन्होंने जिले में किसानों के पंजीयन कार्य में अपेक्षित तत्परता के अभाव की स्थिति को भी रेखांकित किया। कलेक्टर ने प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम पर भुगतान की जिम्मेदारी होने के बावजूद उपज खरीदी में दिलचस्पी नहीं लेने को लेकर नाराजी जताई।

उन्होंने कहा कि ज्यादातर सम्बन्धित अधिकारियों ने न तो योजना को समझने की ईमानदार कोशिश की और न ही मण्डियों का मुआयना करने की तकलीफ गवारा की। श्री चौधरी ने कहा कि कोंदो-कुटकी और मटर को भावान्तर योजना में शामिल करने के लिए पहल के निर्देशों के बावजूद सम्बन्धित अधिकारी द्वारा दिलचस्पी नहीं दिखाई गई। बिजली कम्पनी के अधीनस्थ कार्यालयों में भी होगी आम जन की सुनवाई कलेक्टर श्री चौधरी ने बैठक में बिजली कम्पनी के अधीक्षण यंत्री को निर्देशित किया कि आम जनता की बिजली सम्बन्धी शिकायतों में बढ़ोतरी के मद्देनजर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कम्पनी के अधीनस्थ कार्यालयों में भी आम लोगों की शिकायतों की सुनवाई और समस्याओं के निराकरण के इंतजाम किए जाएं।

शिकायतों को दर्ज करने के लिए पंजियां संधारित की जाएं। यह व्यवस्था सप्ताह में पांच दिन रखी जाए। कलेक्टर ने स्वयं इस इंतजाम की पड़ताल के लिए बिजली दफ्तरों का मुआयना करने की बात भी कही। मण्डियों के इंतजाम तत्काल दुरूस्त किए जाएं कलेक्टर श्री चौधरी ने बैठक में निर्देश दिए कि जिले की चारों मण्डियों में व्यवस्था दुरूस्त करने की दिशा में अविलम्ब कदम उठाएं जाएं। किसान को 15 किमी या इससे अधिक दूरी से मण्डी तक उपज का परिवहन करने पर परिवहन व्यय दिए जाने और भावान्तर योजनान्तर्गत मुहैया कराई जाने वाली अन्य सहूलियतों के बारे में बोर्ड लगवाए जाएं। उपज की ग्रेडिंग में सुधार के लिए छन्नों की व्यवस्था की जाए।

श्री चौधरी ने कहा कि योजनान्तर्गत जारी निर्देशों के मुताबिक किसानों को दो लाख रूपए तक की नगद राशि का भुगतान व्यापारियों द्वारा किया जाएगा। मण्डियों की मौजूदा व्यवस्थाओं को लेकर नाराज कलेक्टर ने जिले के चारों मण्डी सचिवों के खिलाफ कार्रवाई के प्रस्ताव प्रबंध संचालक मण्डी बोर्ड को भेजे जाने के भी निर्देश दिए।

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