ग्वारीघाट के तटों पर समस्याओं का अंबार -अस्थाई चैंजिग रूम गायब, महिलाओं का हो रही भारी दिक्कतें

जबलपुर,यभाप्र। यूं तो हमेशा ही पुण्य सलिला रेवा के तटों पर खासतौर से ग्वारीघाट में सुबह से शाम तक आस्थावानों का मेला लगा रहता है पर पर्व और त्यौहारों में तो यहां नर्मदा मैया के आंचल की छांव पाने के लिए श्रृद्धा का सैलाव उमड़ता है। कार्तिक महीने में तो अल सुबह से ही व्रती महिलाओं की भीड़ तटों पर उमड़ी पर वे परेशान दिखीं क्यों कि न तो तटों पर कहीं भी टीन के अस्थायी चैंजिंग रूम थे न ही कोई ऐसी सुरक्षित जगह जहां वे नहाने के बाद कपड़ ही बदल सकें। वे नकारा व्यवस्था को कोसती रहीं। उल्लेखनीय है कि जुलाई महीने में ही तटों पर रखे टीन के अस्थायी शेड नगर निगम के द्वारा हटा लिए गए पर अब तक उन्हें वापस नहीं रखा गया। महिलाओं का कहना है कि नगर निगम के अधिकारी न जाने इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
इस के अलावा सभी तटों पर पूजन सामग्री की अवैध दुकानें कुकरमुत्तों की तरह ऊग रहीं हैं। तटों पर हाल में 200 से ज्यादा अवैध टपरे जम गए हैं। जो लोगों कर परेशानी का कारण बने हैं। यहां के कई ठीहों में तो मर्नदा में प्रवाहित नारियल मालाएं तक निकालकर बेचीं जाती हैं। सिद्धघाट ,उमाघाट, पंडाघाट, दरोगा घाट, समेत सभी घाटों में जहां तक नजर डालो टपरे ही नजर आते हैं।
उमाघाट में अंधेरे में हो रही महा आरती
उमाघाट में प्रतिदिन ठीक शाम 7 बजे होने वाली आरती के दौरान सामने की लाईट लंबे समय से बंद होने के कारण अंधेरा रहता है। वहीं पहुंचे श्रृद्धालुओं का कहना कि नगर निगम का बिजली विभाग लगता है कुंभकरणी नींद सो रहा है तभी तो मां की आराधना भी अंधेरे में करनी पड़ रही है। यदि घाट में बंद पड़ी लाईट की मरम्मत करा दी जाए और साथ में कुछ और लाईटें लगा दी जाए तो अंधेरे के साम्राज्य से छुटकारा मिल जाएगा। पूराघाट भी जगमगा उठेगा।
बने कई लव्हर प्वाइंट
पावन तटों पर कई जगह लव्हर प्वाइंट बन गए हैं जहां शाम ढलते ही युगल गलबहियां डाले बैठ जाते हैं। कई तो नाव में सवार करते हैं। खास तौर उमाघाट में सीढ़ियों के किनारे बने बगीचे में शाम को अंधेरा होते ही कई जोड़े बैठे नजर आते हैं। इनकी हरकतें देखकर लोग खुुद ही नजरें झुका लेते हैं। पुलिस ने कई बार इन्हें खदेड़ा, हिदायत भी दी पर ये मानते ही नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *