सरकारी ही नहीं प्रायवेट सेक्टर्स में भी आरक्षण-नीतीश कुमार

पटना। पिछले दिनों आरक्षण को लेकर लालू प्रसाद यादव द्वारा नीतीश कुमार को आरक्षण विरोधी करार दिया गया था। लेकिन अब इस मामले में बिहार के मुख्यमंत्री का बड़ा बयान आया है। नीतीश कुमार ने सोमवार को कहा कि आरक्षण सरकारी ही नहीं प्रायवेट सेक्टर्स में भी आरक्षण दिया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस होनी चाहिए। हमने जो भी फैसले किए बिहार की भलाई के लिए किए, यह कारण है कि हम 4 साल पहले वाले अपने गठबंधन में फिर लौटे हैं।

नीतीश कुमार ने इस दौरान एक बार फिर से जीएसटी की वकालत करते हुए कहा कि लोग जीएसटी का विरोध कर रहे लोगों से पूछा जाए कि इसका प्रस्ताव कब आया था। पहले वेट आया था और अब जीएसटी लाया गया है, बदलाव में वक्त लगता है और जीएसटी का विरोध करने का कोई कारण नहीं।

इससे पहले नीतीश कुमार ने पिछले दिनों से चली आ रही बयानबाजी को लेकर निशाना साधा था। नीतीश बोले लालू यादव मेरी समाधि राजगीर में बनवाने की बात कह रहे हैं, इससे घटिया बात और क्या हो सकती है। मैंने अपने 47 साल के राजनीतिक जीवन में कभी इतनी घटिया बात नहीं की और ना करूंगा। दरअसल, आदमी जब परेशान होता है, सत्ता से बंचित होता है तो ऐसी बात बोलता है।

नीतीश कुमार ने कहा कि मुझे तो खुशी है कि मेरी समाधि राजगीर में बने, राजगीर को तो पुण्य स्थली कहते हैं और मेरी समाधि यहां बने, इससे अच्छी बात क्या हो सकती है? नीतीश कुमार ने कहा कि एेसे लोगों के साथ गठबंधन तोड़कर मुझे खुशी हो रही है।

सीएम नीतीश ने कहा कि जो लोग साथ में थे तो शराबबंदी की वकालत की और अब सत्ता से बाहर होते ही लोगों को शराबबंदी गलत लगने लगी। जो लोग शराबबंदी के लिए बनाई गई मानव श्रृंखला में मेरे साथ खड़े थे वो आ्ज शराबबंदी पर अनाप शनाप बोल रहे हैं।

नीतीश ने कहा कि मुझे बचपन से राजगीर पसंद है और मैं राजगीर कुंड में नहाता था और राजगीर जाता था, यदि मेरी समाधि वहां बने तो यह मेरी खुशकिस्मती होगी। लोग विक्षिप्तावस्था में पहुंच गए हैं उन पर मैं उसी तरह की टिप्पणी नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा कि जब सत्ता में थे तो राजद की तरफ से मुझपर दबाब डाला जा रहा था, शराब माफिया और बालू माफिया को संरक्षण दिया जा रहा था। मैंने बहुत मुश्किलों को झेला है, लाॉ और ऑर्डर को संभालना मुश्किल हो गया था, इसीलिए मुझे गठबंधन तोड़ना पड़ा।

नीतीश कुमार ने कहा कि जो लोक हित के लिए सही हो हमने वही काम किया, चाहे वो जीएसटी का समर्थन हो या नोटबंदी का समर्थन हो। इस बात को लेकर भी तरह-तरह की बातें की गईं। अब तो यह भी कहा जा रहा है कि इनका राजनीतिक कैरियर खत्म हो जाएगा। तो एेसे लोगों को तो अब मिठाई बंटवानी चाहिए कि मेरा कैरियर खत्म हो चुका है।

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