कार्तिक पूर्णिमा पर करें पूजा, कष्टों से मिलेगी मुक्ति

धर्म डेस्क। कार्तिक पुर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा का विशेष महत्व है। सत्य को नारायण के रूप में पूजना ही सत्यनारायण की पूजा है। इसका दूसरा अर्थ यह है कि संसार में एकमात्र नारायण ही सत्य हैं, बाकी सब माया है। सत्य में ही सारा जगत समाया हुआ है। सत्य के सहारे ही शेष भगवान पृथ्वी को धारण करते हैं। श्रीसत्यनारायण व्रत का वर्णन देवर्षि नारद जी के पूछने पर स्वयं भगवान विष्णु ने अपने मुख से किया है।

इस कथा को सुनने मात्र से जीव का कल्याण होता है। सत्यनारायण व्रत कथा के दो भाग हैं, व्रत-पूजा एवं कथा। सत्यनारायण व्रत कथा स्कंदपुराण के रेवाखंड से संकलित की गई है।

सत्यनारायण व्रत की कथा-

एक बार नारद जी भ्रमण करते हुए मृत्युलोक आए। यहां उन्होंने लोगों को कर्मों के अनुसार तरह-तरह के दुखों से परेशान होते देखा। इससे उनका हृदय द्रवित हो उठा और वे वीणा बजाते हुए अपने आराध्य भगवान श्रीहरि की शरण में क्षीरसागर पहुंच गये और स्तुति करते बोले, हे भगवान यदि आप मेरे ऊपर प्रसन्न हैं तो मृत्युलोक के प्राणियों की व्यथा हरने वाला कोई छोटा-सा उपाय बताने की कृपा करें।

तब भगवान ने कहा, हे वत्स तुमने विश्वकल्याण की भावना से बहुत सुंदर प्रश्न किया है। आज मैं तुम्हें ऐसा व्रत बताता हूं जो स्वर्ग में भी दुर्लभ है और महान पुण्यदायक है तथा मोह के बंधन को काट देने वाला है और वह है श्रीसत्यनारायण व्रत।

इसे विधि-विधान से करने पर मनुष्य सांसारिक सुखों को भोगकर परलोक में मोक्ष प्राप्त कर लेता है। इसके बाद काशीपुर नगर के एक निर्धन ब्राह्मण को भिक्षावृत्ति करते देख भगवान विष्णु स्वयं ही एक बूढ़े ब्राह्मण के रूप में उस निर्धन ब्राह्मïण के पास जाकर कहते हैं, हे विप्र, श्री सत्यनारायण भगवान मनोवांछित फल देने वाले हैं। तुम उनके व्रत-पूजन करो जिसे करने से मुनष्य सब प्रकार के दुखों से मुक्त हो जाता है।

सत्यनारायण व्रत कथा से होने वाले लाभ-

भगवान श्री सत्यनारायण को भगवान विष्णु का रुप माना जाता है। कहा जाता है कि जो भी सत्यनारायण भगवान की पूजा करता है उसे भगवान विष्णु विशेष आशीर्वाद प्रदान करते हैं। स्कंद पुराण में इसका विशेष उल्लेख किया गया है।

इस पूजा से संबंधित कथा का श्रवण करके सबको प्रसाद वितरित किया जाता है। इस पूजा का इतिहास बहुत पुराना है। इससे घर में सुख समृद्धि के साथ परिवार में धनात्मक उर्जा का संचार होता है। इस कथा के समापन पर ब्राह्मण भोज कराने से अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। जिसमें से कुछ के बारें में हम आपको बता रहे हैं।

-यह घर को आर्थिक रुप से धन-धान्य से भरा बनाता है।

-इसकी सहायता से घर में जमीन, मकान जैसे आर्थिक संसाधनों में वृद्धि होती है।

-इससे बृहस्पति के ग्रह प्रभाव से मुक्ति प्राप्त होती है।

-इससे व्यक्ति को सिद्धि मिलती है।

-यह समग्र भौतिकवादी और आध्यात्मिक विकास को सुरक्षित करता है।

-यह उत्कृष्ट परिणाम और उच्च शिक्षा प्रदान करता है।

-सत्यनारायण व्रत का अनुष्ठान करके मनुष्य सभी प्रकार के कष्टों से मुक्त हो जाता है।

 

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