सांस संबंधी बीमारी वाले मरीज रहें सावधान

जबलपुर,यभाप्र। मौसम में बढ़ रही ठंडक जहां सुकून दे रही है वही अब प्रदूषण लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। इससे लोगों में सांस और त्वचा संबंधी बीमारी भी बढं़ेगी। डॉक्टर इस मौसम में सांस संबंधी बीमारी वाले पुराने मरीजों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। मौसम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक अगले कुछ दिनों में मौसम बदलेगा। दिन और रात के तापमान में कमी आएगी। ठंड के मौसम में हवा कम दबाव से चलती है, जिससे धूल के कण हवा में ज्यादा देर तक रहते हैं। इससे परेशानी बढ़ती है। प्रदूषण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक ठंड में सुबह की हवा में प्रदूषण के तत्व ज्यादा होते हैं। भले ही दिन में सड़कों पर वाहनों का धुआं नहीं हो लेकिन रात को चलने वाले वाहनों का धुआं और उसमें मौजूद जहरीले तत्व कोहरे के कारण ऊपर नहीं जा पाते। इस कारण मरीजों को दिक्कत होती है। धूप निकलने के साथ ये तत्व ऊपर जाते हैं। प्रदूषण के स्तर में लगातार इजाफे का असर मौसम के मिजाज पर पड़ रहा है जिससे बारिश व सर्दी के दिन कम हो गए हैं और औसत तापमान में उछाल दर्ज हुई है। नतीजा, लोगों को मौसमी बीमारियों ने घेर लिया है। खांसी-जुकाम व आंखों में जलन के रोगियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो प्रदूषण में इजाफा हुआ तो तापमान में और बढ़ोतरी होगी। हवा में धुआं व धूल के कण़ों की मात्रा बढ़ी है। प्रदूषण से गर्मी में इजाफा होता है। वर्तमान में शहर के औसत तापमान में दो डिग्री का इजाफा हुआ है। अल्ट्रावायलेट लेजर किरणें प्रदूषण के कारण ऊपर नहीं निकल पा रही हैं। जमीन से निकलने वाली गैसें वातावरण में घुल रही हैं। इसके असर से मौसम में बदलाव आ रहा है। बीमारियां बढ़ रही हैं। प्रदूषण का असर बारिश व सर्दी पर भी पड़ा है। बारिश व सर्दी के दिन कम हो रहे हैं। गर्मी के दिन बढ़ रहे हैं। प्रदूषण विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक 19 अक्टूबर को दीपावली के दिन हुई आतिशबाजी से शहर के प्रदूषण स्तर में जमकर वृद्धि हुई है। पिछले साल की तुलना में यह वृद्धि कम है लेकिन आम दिनों के तुलना में ज्यादा है।
खासी व दमा की शिकायतें बढ़ी

प्रदूषण स्वांस रोग को देता है जन्म
प्रदूषण दो तरह का होता है। एक धूल कण और दूसरा धुएं से फैलने वाला पॉल्यूशन। धुएं में जब डस्ट पार्टीकल मिलकर सांस के जरिए फेंफड़ों में जाते हैं तो यह कई प्रकार के रोगों को जन्म देते हैं। यदि कोई दमा का मरीज है तो इसके लिए यह घातक है। प्रदूषण के कारण फेंफड़ों से संबंधित अलग-अलग तरह की बीमारियां हो सकती हैं। ठंड में वायु प्रदूषण बढ़ता है। यह पुराने मरीजों के लिए घातक है। अगर कोई व्यक्ति सांस और त्वचा संबंधी बीमारी से परेशान है तो उसे किसी भी स्थिति में उपचार बंद नही करना चाहिए। उन्हें धूल और धुएं के संपर्क में आने से बचना चाहिए। ऐसे लोगों को अलाव से भी बचना चाहिए।
– डॉ टीके सईकिया
इस समय तापमान कम है और धुआं बढ़रहा है। वातावरण में फैलने वाले धुएं में मेटल, हैवी मेटल एवं सल्फर डस्ट होती है। यह जब नमी के साथ मिलकर सांस के साथ व्यक्ति के अंदर जाते हैं तो एलर्जी, खांसी एवं दमा की शिकायत बढ़ जाती है। वर्तमान में इस प्रकार के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। इसके अलावा सर्दी खांसी एवं डेंगू जैसी मौसमी बीमारियां भी बढ़ी हैं।
– डॉ दीपक वरकड़
ठंड में सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में वृद्धि हो जाती है लेकिन लोगों को इससे खुद को बचाना चाहिए। कम रोग प्रतिरोधक क्षमता और सांस संबंधी रोग से पीड़ित मरीजों को इस मौसम में एहतियात बरतने की आवश्यकता होती है। धूल में मुंह पर कपड़ा बांधना चाहिए। वहीं ठंड से भी खुद का बचाव करें।
-डॉ. रिषी डाबर

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