नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने सीबीआई की जांच पर उठाए गंभीर सवाल  

भोपाल । नेता प्रतिपक्ष  अजय सिंह ने कहा है कि जिस उम्मीद और विश्वास के साथ व्यापम महाघोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी, उसे ध्वस्त करते हुए सीबीआई महाघोटाले के आरोपियों, इससे जुड़ी मौंतों के मामले में दोषियों को क्लीनचिट देने का काम कर रही है। नेता प्रतिपक्ष श्री सिंह ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब सीबीआई अपनी जांच रिपोर्ट अदालत में पेश करके कहे कि व्यापमं महाघोटाला हुआ ही नहीं था।

नेता प्रतिपक्ष श्री सिंह ने कहा कि इस घोटाले के मुख्य आरोपी जिन्हें नियम विरूद्ध व्यापम का डायरेक्टर और कंट्रोलर बनाया था, उसका सीबीआई की चार्जशीट में नाम न होना दर्शाता है कि वह इस महाघोटाले में किसको बचाने और किसको फसाने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री को दर्जनों बार क्लीनचिट तो सीबीआई दे रही है लेकिन यह भूल रही है कि विश्व के सबसे बड़े इस महा घोटाले के दौरान वे ही मुख्यमंत्री थे।

ऐसे व्यक्ति का सीबीआई की चार्जशीट में नाम न होना क्या बतलाता है

उन्होंने कहा कि पंकज त्रिवेदी 2013 में पीएमटी प्रवेश परीक्षा में हुए घोटाले के दौरान कंट्रोलर और डायरेक्टर थे व्यापम के। जिस पोस्ट पर पंकज त्रिवेदी थे वह टेक्नीकल पोस्ट थी, जिसकी योग्यता इंजीनयरिंग में डिग्री थी और पंकज त्रिवेदी कामर्स फेक्लटी के थे। स्पष्ट है कि उनकी नियुक्ति नियम विरूद्ध थी। उन्हें जब गिरफ्तार किया तो उनके पास से 1 करोड़ रूपए नगद जप्त हुआ था। वे ढाई साल जेल में भी रहे। ऐसे व्यक्ति का सीबीआई की चार्जशीट में नाम न होना क्या बतलाता है। वर्ष 2008, 2009 और 2010 तक श्री सुधीर भदौरिया व्यापमं के कंट्रोलर और डायरेक्टर थे, इस दौरान जो परीक्षाएं हुई उसके 333 परीक्षार्थी जो एमबीबीएस में चयनित हुए थे, सुप्रीम कोर्ट ने उनका चयन रद्द कर दिया गया था। इनके चयन के दौरान सुधीर सिंह भदौरिया कंट्रोलर और डायरेक्टर थे उनसे न सीबीआई ने न कोई पूछताछ की और न ही कोई एफआईआर हुई। मेघना भदौरिया जो सुधीर भदौरिया की बेटी थी। वर्ष 2013 की पीईटी परीक्षा में उसका चयन हुआ था, जिसे निरस्त कर दिया गया। उसके खिलाफ भी सीबीआई ने कोई शिकायत दर्ज नहीं की। श्री सिंह ने कहा कि सीबीआई ने 09 जुलाई 2015 को व्यापमं घोटाले की जांच का दायित्व संभाला था। इन ढाई सालों में सभी बड़े आरोपी जमानत पर छूटे।

कोई पूछताछ सीबीआई ने नहीं की

सीबीआई ने अपने कार्यकाल के दौरान फोकस गलत तरीके से परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थियों और पालकों के विरूद्ध किया गया लेकिन इन गड़बड़ियों के शीर्ष स्तर पर बैठे सूत्रधारों को छुआ भी नहीं।  आरएसएस के पूर्व सरसंघचालक स्व. सुदर्शन जी के निज सचिव मिहिर चौधरी, जिनका चयन नापतौल विभाग में सब इस्पेंटर में व्यापम के जरिए हुआ था, उसने अपने बयान में कहा स्व. श्री सुदर्शन जी और आरएसएस के सुरेश सोनी का नाम लिया था, उनसे कोई पूछताछ सीबीआई ने नहीं की। मिहिर चौधरी के प्रकरण में सरकार हाईकोर्ट में हार गई थी, लेकिन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कोई अपील नहीं की। इससे स्पष्ट था कि सरकार इनकी नियुक्ति में गड़बड़ी स्वीकार की थी। इसलिए सरकार सुप्रीमकोर्ट नहीं गई। इसकी भी कोई जांच सीबीआई ने नहीं की।

अपनी तरफ से एक भी बिन्दु इस घोटाले से संबंधित जोड़ा

श्री सिंह ने कहा कि ट्रांसपोर्ट कांस्टेबल भर्ती घोटाला की भी कोई जांच सीबीआई ने नहीं की, जबकि इसमें तत्कालीन परिवहन मंत्री जगदीश देवड़ा के निज सचिव गुर्जर आरोपी हैं। एसटीएफ ने पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को व्यापमं घोटाले के इस मामले में चार्जशीट पर शामिल किया था, उसमें राजभवन का नाम भी था, उसमें मिनिस्टर-1, मिनिस्टर-2 और एम/एस का उल्लेख था। यह कौन लोग हैं सीबीआई ने इनकी न कोई जांच की और न ही इस मामले में चार्जशीट के लोगों से कोई पूछताछ की। पूर्व में 250 एफआईआर और 2500 आरोपी व्यापमं घोटाले में बनाए गए थे। ढाई साल में व्यापमं घोटाले की जांच में सीबीआई ने कुल मिलाकर अपनी तरफ से एक भी बिन्दु इस घोटाले से संबंधित जोड़ा नहीं और जिन मामलों की एसटीएफ ने जांच की थी। उसी को आगे बढ़ाते हुए सरकार को क्लीनचिट देने का सिलसिला शुरू कर दिया है।

मुख्यमंत्री ने  गड़बड़ी होने की बात स्वीकार की थी

जब सीबीआई को केस एसटीएफ ने हैंडओवर किया था, तब 1200 शिकायतें पेंडिंग थी, जिसमें से एक शिकायत की भी जांच सीबीआई ने नहीं की और न ही कोई एफआईआर दर्ज की। इसके अलावा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के पूर्व निज सचिव और उनके नजदीकी विदिशा के गुलाबसिंह किरार का नाम भी इस महाघोटाले में शामिल था। सीबीआई इनसे भी दूर ही रही।  नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा विभाग का प्रभार रहते हुए स्वयं मुख्यमंत्री ने मार्च 2011 में विधानसभा में यह स्वीकार किया था कि वर्ष 2009 की प्रवेश परीक्षा में 114 लोगों की गलत नियुक्ति हुई है। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में ही एक प्रश्न के उत्तर मे व्यापम की परीक्षा में 1000 गड़बड़ी होने की बात स्वीकार की थी, इसकी भी पड़ताल सीबीआई ने नहीं की।  श्री सिंह ने कहा कि व्यापमं घोटाले के बाद 55 मौत हो चुकी हैं। यह सभी घोटाले से जुड़े हुए लोग थे। इनमें एक प्रमुख आरोपी पटेल थे, जो रायपुर में अपने कमरे में फांसी में झूलते हुए मिले। जबलपुर मेडिकल कालेज के डीन डॉ. साकल्ले, जो पीएमटी परीक्षाओं के माध्यम से फर्जी भर्तियों की जांच कर रहे थे, उन्हें जिंदा जला दिया गया। उनके अपराधी आज तक पकड़े नहीं गए। सीबीआई ने इस संबंध में भी कोई जांच नहीं की। उल्टा सीबीआई ने 23 मौतों में क्लीनचिट दे दी कि यह व्यापमं से जुड़ी मौंते नहीं हैं।  इस घोटाले को उजागर करने वाले डॉक्टर आनंद राय ने सीबीआई को व्यापम महाघोटाले से संबंधित 15 शिकायत की, उनकी न तो जांच सीबीआई ने की और न ही कोई एफआईआर दर्ज की। व्यापमं की 55 परीक्षाओं में घोटाले हुए, इसकी भी कोई जांच नहीं की गई, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण जांच थी ट्रांसपोर्ट कान्सटेवल की भर्ती, जिसमें गोंदिया के लोगों की भर्ती हुई|

सीबीआई ने 23 मौतों में क्लीनचिट दे दी

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जहां तक एक्सल शीट का हवाला देते हुए सीबीआई ने मुख्यमंत्री को क्लीनचिट दी है वह मात्र एक मामले की, जो संविदा शिक्षक भर्ती मामले की एक्सल शीट है। इसके अलावा अन्य परीक्षाओं की एक्सल शीट की जांच होना बाकी हैं। और अभी इस पर निर्णय न्यायालय करेगी कि सीबीआई की यह जांच सही है या नहीं।  नेता प्रतिपक्ष श्री सिंह ने कहा कि सीबीआई जैसी संस्था को उस समय जांच सौंपी जाती है, जब स्थानीय संस्थाओं पर विश्वास न हो और उनकी जांच को संदेह की नजर से देखा जाता है।

सीबीआई महाघोटाले के बड़े आरोपियों को बचाने में लग गई 

व्यापम महाघोटाले में एसटीएफ, जो राज्य सरकार के अधीन है, से जांच वापस लेकर सीबीआई को इसलिए सौंपी गई थी क्योंकि आरोप में सत्ता शीर्ष से जुड़े लोग थे, जिनकी जांच एसटीएफ के बस की नहीं थी, ताकि निष्पक्ष तरीके से जांच हो सके। सीबीआई ने व्यापम महाघोटाले के बाद इससे जुड़ी मौतों और सीडी के मामले में जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट में चार्जशीट पेश की है उससे स्पष्ट हो गया है कि अब सीबीआई महाघोटाले के बड़े आरोपियों को बचाने में लग गई है।

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