देव जागे, तुलसी-शालिगराम विवाह हुआ

जबलपुर। देवउठनी एकादशी पर शहर के मंदिरों सहित घर-घर में तुलसी-शालिगराम विवाह के कार्यक्रम हुए। छोटी दीपावली पर आतिशबाजी से लेकर दीपदान किए गए। मंदिरों में विशेष कार्यक्रम हुए। भजन संध्या, आरती, पूजन और श्रंगार के कार्यक्रम हुए। इसके साथ ही शुरू कार्यों के लिए लगा ब्रेक खुल गया। हालांकि लोगों को विवाह के शुभ मुहूर्त के लिए अभी 19 नवंबर तक का इंतजार करना होगा। आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक यानी चार महीने भगवान विष्णु शयन काल की अवस्था में होते हैं और इस दौरान कोई शुभ कार्य जैसे, शादी, गृह प्रवेश या कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। देवउठनी एकादशी के बाद सभी तरह के शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं, लेकिन इस बार देव जागने के 18 दिन बाद भी कोई वैवाहिक व अन्य मांगलिक कार्यों (गृह प्रवेश) के लिए शुभ मुहूर्त नहीं है।

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इस साल नवंबर में 19, 22, 23, 24, 28, 29 और 30 नवंबर को विवाह के विशिष्ट मुहूर्त हैं। 3, 4, दिसंबर को विवाह मुहूर्त बन रहे हैं। 15 दिसंबर 2017 से 14 जनवरी 2018 तक मलमास रहेगा। मकर संक्रांति के बाद विवाह मुहूर्त शुरू होते हैं किंतु इस बार शुक्र अस्त हैं। इसलिए जनवरी में कोई मुहूर्त नहीं है।
देवउठनी ग्यारस नया व्यवसाय
देवशयन के कारण चार महीने तक नए व्यापार-व्यवसाय की भी शुरुआत नहीं होती है। देवउठनी ग्यारस के बाद अब लोग नया व्यापार शुरू कर सकेंगे। इसके अलावा अन्य किसी भी तरह का नया कार्य भी शुरू करना फलदायक रहेगा।
देव-प्रतिष्ठा
मंदिरों में देवताओं की प्राण-प्रतिष्ठा अब शुरू हो सकेगी। साथ ही नए मंदिर का भूमि पूजन कार्य भी शुरू होगा। इसके अलावा बटुकों का उपनयन संस्कार सहित सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत भी हो सकेगी।
गृह प्रवेश, भूमिपूजन
नए घर के लिए भूमिपूजन, गृह प्रवेश आदि भी अब शुरू हो जाएंगे। हालांकि गुरु का तारा अस्त है। इसलिए 6 नवंबर से तारा उदय होने के बाद इनकी शुरुआत भी हो जाएगी। जुलाई से यह सभी कार्य बंद थे। अब इसके मुहूर्त पंचांगों ने नवंबर से दिए हुए हैं।

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