दुरुस्त बहीखाते पर ही मिलेगी पूंजी

नई दिल्ली : फंसे कर्ज की समस्या से जूझ रहे सरकारी बैंकों को राहत देने के लिए 1.35 लाख करोड़ रुपए पुनर्पूंजीकरण बांड के रूप में जारी किए जाएंगे। वरिष्ठ अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है। इसका स्वरूप क्या होगा, इस पर अभी माथापच्ची चल रही है लेकिन सूत्रों के मुताबिक इस बात की प्रबल संभावना है कि कमजोर बैंकों को केवल अपनी प्रावधान जरूरतों को पूरा करने के लिए पूंजी मिलेगी जबकि मजबूत बैंकों को वृद्धि के लिए भी पूंजी दी जाएगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को बैंकों के लिए 2.11 लाख करोड़ रुपए की पुनर्पूंजीकरण योजना को मंजूरी दी थी। अर्थव्यवस्था में तेजी लाने और रोजगार सृजन के लिए सरकार छोटे व मझोले उद्यमों के लिए ऋण गतिविधियों को बढ़ाना चाहती है। बैंकों को ये बांड 2 साल की अवधि में जारी किए जाएंगे लेकिन ज्यादातर अगली 3-4 तिमाहियों में जारी होंगे। वित्त मंत्रालय पुनर्पूंजीकरण बांड के स्वरूप और दूसरी बारीकियों पर काम कर रहा है। अगले कुछ सप्ताह में इनकी घोषणा की जाएगी।

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एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दुरुस्त बहीखातों पर ही पूंजी मिलेगी। एक अधिकारी के मुताबिक पुनर्पूंजीकरण बांड की कुल पूंजी को 2 हिस्सों में बांटा जाएगा। इनमें से एक हिस्सा प्रावधान जरूरतों के लिए और दूसरा वृद्धि जरूरतों के लिए होगा। पुनर्पूंजीकरण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले बैंकों को फंसे कर्ज के एक छोटे हिस्से को बट्टे खाते में डालकर अपना बहीखाता दुरुस्त करने और फंसे कर्ज से जुड़े मामलों को दिवालिया कानून के तहत राष्ट्रीय कम्पनी कानून पंचाट में भेजने के लिए कहा जा सकता है। अधिकारी ने इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी लेकिन कहा कि अभी नीति-निर्माताओं के बीच इस बारे में चर्चा चल रही है।

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नहीं बनाई जाएगी कोई होडिंग कम्पनी
एक अधिकारी ने कहा कि केन्द्र सरकार खुद ये बांड जारी करेगी और इनके बदले बैंक के शेयरों को रखने के लिए कोई होल्डिंग कंपनी नहीं बनाई जाएगी। इससे पहले 1990 के दशक के मध्य में 20,000 करोड़ रुपए के बैंक पुनर्पूंजीकरण बांड जारी किए गए थे। सरकार इस बार भी उसी तरह के बांड जारी करना चाहती है। इससे राजकोषीय घाटे पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि इसमें नकदी शामिल नहीं है लेकिन सरकार को सालाना ब्याज का भुगतान करना पड़ेगा।

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