गड़बड़ी से ध्यान हटाने पूर्व बीएमओ ने की थाने में शिकायत

नौगांव। काफी समय तक बीएमओ रहे डॉ. जेपी तिवारी और उनकी पत्नी डॉ. ऊषा तिवारी पर लाखों रूपए की गड़बड़ी के आरोप लगे थे। आरोपों को लेकर स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने नोटिस भिजवाया। वर्तमान बीएमओ ने नोटिस पूर्व बीएमओ तक पहुंचाने की कोशिश की लेकिन जब वे नोटिस लेने को तैयार नहीं हुए तो उनके क्लीनिक और निवास पर नोटिस चस्पा किया गया। इसी बात से बौखलाए डॉ. तिवारी ने बीएमओ डॉ. अजय यादव और कुछ मीडियाकर्मियों पर बदसलूकी का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत दी है। इस शिकायत को गड़बड़ी पर पर्दा डालने के रूप में देखा जा रहा है।
इन आरोपों पर चल रही विभागीय जांच
डॉ. ऊषा तिवारी पर आरोप लगे थे कि वह प्रसूताओं से अवैध रूप से फीस लेकर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराती थीं एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में जननी सुरक्षा योजना का हितग्राहियों को लाभ नहीं मिलने एवं शासन की योजना के लाभ से हितग्राहियों को अवगत नहीं कराया जाता।
महिला चिकित्सा अधिकारी के पद पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र नौगांव में पदस्थ नोडल अधिकारी जननी सुरक्षा योजना द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का 29, 30 एवं 31 मई 2008 को पंजी संधारण का सत्यापन किया गया जिसमें डॉ. ऊषा तिवारी द्वारा 90 प्रतिशत प्र्रसूताओं से फीस वसूलकर चिकित्सालय में भर्ती किया जाना और बाजार से दवाएं क्रय किए जाने की बात सामने आयी।
डॉ. जेपी तिवारी द्वारा वर्ष 2005 में कर्मचारियों के हक की राशि 152849 रूपए आहरित कर साढ़े तीन माह तक वित्तीय अनियमितता की गई।
अधीनस्थ स्वास्थ्य सेवाओं का पर्यवेक्षण, निरीक्षण नहीं करने एवं स्वास्थ्य केन्द्र हरपालपुर, महाराजपुर, गर्रोली, अलीपुरा में हितग्राहियों को जननी सुरक्षा का लाभ न मिलने एवं अधीनस्थ स्टाफ द्वारा अवैध रूप से इलाज के नाम पर रूपए मांगने के आरोप।
सूचना के अधिकार के अंतर्गत जानकारी उपलब्ध न कराकर अधिनियम का उल्लंघन किया गया। अधिकारियों व कर्मचारियों से व्यवहार उचित नहीं रहा

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