विवि परीक्षाओं के लिये बड़ा कदम : यूजी में 5 और पीजी में 3 साल की बाध्यता खत्म

भोपाल। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अब स्नातक में पांच साल और स्नातकोत्तर कक्षाओं में तीन साल की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। अगर कोई छात्र इस अवधि में किसी कारण से पाठ्यक्रम पूरा नहीं कर पाता है तो भी वह स्वाध्यायी छात्र के रूप में पाठ्यक्रम को पूरा कर पाएगा।

बुधवार को विश्वविद्यालयों की समन्वय समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया। इसी के साथ दीक्षांत समारोह में पारंपरिक वेशभूषा पर भी मुहर लगा दी गई। इसमें छात्र कुर्ता पायजामा, जैकेट और छात्राएं साड़ी पहनेंगी।

बैठक में विश्वविद्यालयों के अधिनियम और परिनियमों की एकरूपता को लेकर भी सहमति बनी।

इस मौके पर कुलाधिपति ओमप्रकाश कोहली ने कहा कि यह एक सही दिशा में लिया गया कदम है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयीन प्रणाली को विश्वसनीय एवं जवाबदेह बनाना होगा। इसके लिए महाविद्यालयीन एवं विश्वविद्यालयीन सेवाओं को लोक सेवा गांरटी अधिनियम 2005 के अधीन लाना चाहिए।

परीक्षा की मशीन नहीं बनें विवि

बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि विवि शोध कार्य पर ध्यान दें। विवि या कॉलेज सिर्फ परीक्षा कराने की मशीन नहीं बनें। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसरों के वातावरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों में राष्ट्रीयता,समरसता और सदभाव का वातावरण मजबूत बनाने के लिये सभी संभव प्रयास होना चाहिए।

एनएसएस इलेक्टिव विषय के रूप में शामिल

बैठक में एनएसएस के पाठ्यक्रम को इलेक्टिव विषय के रूप में शामिल करने का निर्णय लिया गया। एनएसएस के पाठ्यक्रम को वैकल्पिक विषय के रूप में स्नातक स्तर पर लागू किया जाएगा। यह पाठ्यक्रम स्नातक स्तर के किसी भी विषय के साथ पढ़ाया जाएगा। पाठ्यक्रम में एनएसएस,योग और कौशल विकास को शामिल किया जाएगा जिसका अनुपात क्रमश: 50:25:25 रहेगा।

आईयूएमसी का प्रस्ताव स्वीकृत

बैठक में इंट्रीग्रेटेड यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम (आईयूएमसी ) के संबंध में बैठक में सभी राज्य विश्वविद्यालयों को केंद्रीयकृत के स्थान पर विकेंद्रीकृत प्रणाली लागू करने की अनुमति देने और इस व्यवस्था को लागू करने का फैसला हुआ। इसके लिए अधिकतम 6 माह की अवधि निर्धारित करने की अनुमति देने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया।

माशिमं की समतुल्य परीक्षा का पालन हो

बैठक में देश के अन्य प्रदेशों से आने वाले 12वीं पास छात्रों को स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए सभी विश्वविद्यालयों को माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा विभिन्न् परीक्षाओं को कक्षा 10 वीं एवं 12 वीं के समकक्ष समतुल्यता संबंधी निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया। इस मौके अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा बीआर नायडू , राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. एम मोहनराव, प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा संजय बंदोपाध्याय, आयुक्त उच्च् शिक्षा नीरज मंडलोई, विश्वविद्यालयों के कुपलति उपस्थित थे।

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