ग्वालियर। जयारोग्य अस्पताल के सर्जरी विभाग के पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में बीती रात एक फर्जी डॉक्टर ने जमकर हंगामा किया। पहले उसने मरीजों से तकलीफ पूछी, इसके बाद अटेण्डेंट को बेल्ट से पीटना शुरू कर दिया। घबराया अटेण्डेंट दौड़कर नीचे पहुंचा और गार्डों को बताया कि डॉक्टर साहब पागल हो गए हैं, अटेण्डेंट को बेल्ट से पीट रहे हैं। घटना की जानकारी मिलने पर गार्ड पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में पहुंचे तो फर्जी डॉक्टर भाग गया। हालांकि गार्डों ने उसे निजी मेडिकल स्टोर के पास से पकड़कर 100 डायल के हवाले कर दिया।

सर्जरी विभाग के पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में बुधवार-गुरुवार की रात 1 बजे एक व्यक्ति दाखिल हुआ। उसने मरीजों से कहा कि वह पूरे मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेज में निरीक्षण करता है और हर सात दिन में जेएएच आता है। यदि आप लोगों को कोई भी परेशानी हो तो मुझे बता सकते हो। इस दौरान वार्ड में भर्ती मुरैना निवासी सुनीता से उसने इलाज के बारे में जानकारी ली।

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इसके बाद बाहर सो रहे महिला के अटेण्डेंट से कहा कि तुम लोग महिला को खाना तक नहीं देते हो और बेल्ट निकालकर पीटना शुरू कर दिया। घबराया अटेण्डेंट दौड़कर नीचे आया और बीवीजी कंपनी के गार्डों को बताया कि वार्ड में डॉक्टर साहब पागल हो गए हैं, वह बेल्ट से लोगों को पीट रहे हैं। सिक्युरिटी गार्ड गोविंद सिंह बैस और कृष्णा कदम जब पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में पहुंचे तो फर्जी डॉक्टर मेडिकल वार्ड में जाली से कूदकर भाग गया।

गाड़ी से पकड़ा फर्जी डॉक्टर –

फर्जी डॉक्टर के भागने के बाद जब जांच हुई तो पता चला कि उसकी एक्टिवा बाहर खड़ी है। गार्डों ने एक्टिवा पर निगरानी शुरू कर दी। उधर फर्जी डॉक्टर ने एक लड़के को पैसे देकर अपनी गाड़ी उठाने के लिए भेजा तो गार्डों ने उसे पकड़ लिया। पूछताछ में लड़के ने बताया कि जेएएच परिसर में बने निजी मेडिकल स्टोर के पास खड़े व्यक्ति ने उसे गाड़ी उठाकर लाने के लिए कहा था। इसके बाद गार्डों ने घेराबंदी करके फर्जी डॉक्टर को पकड़ लिया। हालांकि गार्ड पूछताछ करते इसके पहले ही 100 डायल पहुंच गई और उसे पकड़कर ले गई। फर्जी डॉक्टर का नाम गुलशन यादव निवासी कर्मचारी आवास विकास कॉलोनी बताया गया है। गार्डों के मुताबिक उसने शराब भी पी रखी थी।

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घटना के समय मौजूद नहीं था स्टाफ –

पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में जब फर्जी डॉक्टर अटेण्डेंट को पीट रहा था तब कोई स्टाफ मौजूद नहीं था। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से मरीजों की जान भी खतरे में पड़ सकती थी, क्योंकि फर्जी डॉक्टर यदि चाहता तो गलत दवा या इंजेक्शन से किसी मरीज को नुकसान भी पहुंचा सकता था। यदि बीवीजी कंपनी के गार्ड तुरंत हरकत में नहीं आते तो फर्जी डॉक्टर किसी गंभीर घटना को अंजाम दे सकता था।

गाड़ी का बीमा नहीं था, जुर्माना वसूलकर छोड़ा –

100 डायल फर्जी डॉक्टर को पकड़कर तो ले गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। वहीं अस्पताल प्रबंधन की तरफ से भी कोई शिकायत नहीं हुई। ऐसे में पुलिस ने फर्जी डॉक्टर के वाहन का बीमा नहीं होने के कारण एक हजार का जुर्माना करके छोड़ दिया।

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पहले भी हो चुकी है घटना –

करीब तीन माह पहले भी जेएएच के न्यूरोलॉजी विभाग में एक फर्जी डॉक्टर को सिक्युरिटी गार्डों ने पकड़ा था। इस मामले में तो फर्जी डॉक्टर ने बकायदा इलाज भी करना शुरू कर दिया था। अस्पताल प्रबंधन और पुलिस की यह लापरवाही कभी भी गंभीर घटना का कारण बन सकती है।