टीआई पर लगाए गए आरोपों की गंभीरता से हो रही जांच

जबलपुर, मुनप्र। विगत दिवस सिविल लाईन थाने में पदस्थ एक आरक्षक के द्वारा आत्महत्या की घटना से मोहकमे से सनसनी व्याप्त है। मृतक के परिजनों द्वारा सिविल लाईन थाना प्रभारी पर मृतक को प्रताड़ित किए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जिसके चलते पुलिस अधीक्षक शशिकांत शुक्ला ने इस पूरे मामले की जांच सीएसपी एमपी प्रजापति को सौंप दी है और वे पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं। ज्ञात हो कि आरक्षक द्वारा आत्महत्या किए जाने के बाद परिजनों द्वारा आक्रोश व्यक्त करते हुए सिविल लाईन थाने के सामने धरना प्रदर्शन कर विरोध करते हुए थाना प्रभारी पर आरोप लगाए हैं। बमुश्किल पुलिस के आला अफसर मृतक के परिजनों को समझा पाए जिसके बाद मृतक के शव का पंचनामा कर पीएम के उपरांत उसके शव को छिंदवाड़ा गृहनगर भेज दिया गया जहां उसका गत शाम अंतिम संस्कार किया गया। अपने साथी युवा पुलिस कर्मी की मौत से व्यथित अनेक पुलिस कर्मचारी भी अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए छिंदवाड़ा गए हुए थे। हालांकि मृतक के पास से एक सुसाइट नोट भी मिला था लेकिन उसमें थाना प्रभारी का कहीं उल्लेख नहीं किया गया। अक्सर सुसाइट नोट के मामले में पुलिस गोपनीयता बरती है लेकिन थाना प्रभारी पर आरोप लगने के बाद पुलिस ने जल्दबाजी में सुसाइट नोट को ही सार्वजनिक कर दिया जबकि ऐसा होता नहीं है। क्योंकि सुसाइट नोट जांच का विषय होता है लेकिन पुलिस ने अपने दामन पर दाग लगने से बचने के लिए सुसाइड नोट जारी कर दिया जो चर्चा का विषय बना हुआ है।
एक चर्चा यह भी
आरक्षक द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना के बाद तरह तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं और इन्हीं चर्चाओं में से एक बात निकलकर सामने आ रही है कि एक तो थाना प्रभारी उसे बेवजह प्रताड़ित किया करते थे साथ ही पिछले दो माह से उसके वेतन को भी रुकवा दिया था जिससे वह आर्थिक रूप से भी परेशान था क्योंकि परिवार की सारी जि मेदारी युवा आरक्षक के ऊपर ही थी।
साथियों की नजर में भला युवक था।
सिविल लाईन थाने के स्टाफ से जब मृतक आरक्षक के संबंध में चर्चा की गयी तो ज्यादातर लोगों का यही कहना था कि वह काफी मिलनसार और मृदुभाषी स्वभाव का था और किसी भी दंद फंद में उसकी संलिप्तता कभी सामने नहीं आयी। शायद उसके सीधे पन का ही फायदा उठाकर उसे प्रताड़ित किया जाता रहा। हालांकि पुलिस अभी विवेचना और जांच की बात करते इस मामले को टालने में लगी है। लेकिन जिस तरह की चर्चाएं पुलिस मोहकमे में व्याप्त हैं उसके चलते यह तो तय है कि कोई न कोई ऐसा कारण जरूर था नहीं तो कोई ऐसे जान नहीं देत सकता।
क्या कह रहे जांच अधिकारी
इस संबंध में जब आज जांच अधिकारी सीएसपी श्री प्रजापति से संपर्क किया गया तो उनका कहना था कि कल तो पुलिस उसके शव को छिदवाड़ा भिजवाने पीएम करवाने आदि में व्यस्त रही लेकिन अब आरक्षक के अंतिम संस्कार के बाद पुलिस जांच में जुट गयी है और जल्द ही कुछ परिणाम सामने आ सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि छिंदवाड़ा जिले का रहने वाला विक्रम जांगड़े वर्तमान में सिविल लाईन थाने में पदस्थ था। वह पुलिस लाईन क्वार्टर में अकेले रहता था। मंगलवार सुबह वह पुलिस की जनरल परेड में भी शामिल हुआ था। परेड के बाद विक्रम थाने अपनी ड्यूटी गया और दोपहर में घर लौटकर आया था। विक्रम का खाना सामने रहने वाले आरक्षक दिनेश उईके के घर पर बनता था। दोपहर 3ः30 बजे तक जब विक्रम खाना खाने नहीं आया तो उसे बुलाने के लिए दिनेश गया। कई बार आवाज लगाने के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला तो दिनेश ने धक्का देकर दरवाजा खोला तो विक्रम फांसी के फंदे पर झूल रहा था। विक्रम ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि वह अपनी जिंदगी से हारकर यह कदम उठा रहा है। इसके अलावा उसने अपने परिजनों के लिए भी भावनात्मक शब्दों का उपयोग करते हुए लिखा है तथा दोस्तों के बारे में भी चर्चा की है और दोस्तों के सहयोग के लिए उनके प्रति आभार भी व्यक्त किया है।विक्रम अविवाहित था और परिवार की जि मेदारी भी उठा रहा था। विक्रम की आत्महत्या से परिवार के ऊपर वज्रघात हो गया है।

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