नहीं रहे विश्वनाथ दुबे राजनीतिक जगत में शोक की लहर

जबलपुर, नगर प्रतिनिधि। देश के जानेमाने पॉल्ट्री व्यवसायी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व महापौर विश्वनाथ दुबे का आज तड़के निधन हो गया। वे कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे जिनका उपचार शहर के एक निजी अस्पताल में चल जा रहा था जहां आज तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से पूरे शहर में शोक की लहर है। जितना बड़ा उनका कद था उससे कहीं बड़ा उनका व्यक्तित्व। शहर का ऐसा कोई वर्ग नहीं है जहां उनके चाहने वाले न रहे हों। श्री विश्वनाथ दुबे का अंतिम संस्कार दोपहर बाद रानीताल मुक्तिधाम में किया जाएगा। दोपहर तीन बजे उनकी अंतिम यात्रा निज निवास नयागांव रामपुर से प्रारंभ होगी।
बस यादें शेष
विश्वनाथ दुबे व्यापार हो, राजनीति हो, समाजसेवा हो, शिक्षा हो हर क्षेत्र में अग्रणी रहे। उन्होंने इस शहर को इतना कुछ दिया है कि कभी उसे भुलाया नहीं जा सकेगा। ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के बाद भी उन्होंने उस दौरान नवाचार की बात की जब लोगों को इसका मतलब भी नहीं पता था। समाज और परिवार के विरोध के बाद भी पॉल्ट्री का व्यापार किया जबकि वे प्रदेश के प्रतिष्ठित ब्राह्मण परिवार कुंजीलाल दुबे के सुपुत्र थे।लेकिन वे पीछे नहीं हटे और उन्होंने अपने व्यापार को देश ही नहीं एशिया में भी अग्रणी स्थान दिलाया। इसके अलावा वे कई सामाजिक संस्थाओं और खिलाड़ियों को समय समय पर पूर्ण सहयोग करते रहे।
निगम को दिलाया महत्व
जब विश्वनाथ दुबे जबलपुर के महापौर बने उस समय नगर निगम एक घाटे में चलने वाली संस्था मानी जाती थी जहां फंड तो दूर की बात कर्मचारियों की तन्खा भी समय पर नहीं मिलती थी लेकिन उन्होंने अपनी दूरदृष्टि और प्रबंधकीय कौशल के चलते इस घाटे की मशीन को एक मजबूत संस्था के रूप में पहचान दी। यह उनकी ही दूरदृष्टि थी कि आज शहर को निगम के माध्यम से अरबों की विकास योजनाएं बन रहीं हैं। आज जब करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी योजनाएं समय पर पूरी नहंी हो पातीं और पूरा होने के पहले ही उनके परखच्चे उड़ जाते हैं ऐसे में उन्होंंने कम पैसों में गुणवत्ता पूर्ण मॉडल रोड का निर्माण किया जिसकी दो दशकों के बाद भी एक गिट्टी भी नहीं निकली।
विवेक तन्खा ने दी श्रद्घांजलि
श्री दुबे के करीबी रहे सांसद विवेक तन्खा ने उनके निधन को अपूर्णीयक्षति बताते हुए इसे प्रदेश और शहर के साथ साथ अपने लिए भी एक व्यक्तिगत क्षति बताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें दुबे जी से हमेशा आगे बढ़ते रहने और लक्ष्य को हासिल करने की प्रेरणा मिलती रही है। उनके निधन पर जैन पंचायत सभा के सतेन्द्र जैन जुग्गू सहित व्यवसायी , उद्योगपति, समाजसेवी, शिक्षाविद, राजनेता सभी ने शोक व्यक्त करते हुए श्रद्घांजलि दी।
मेरे पितातुल्य थे
यशभारत के संस्थापक आशीष शुक्ला ने भी श्री विश्वनाथ दुबे को श्रद्घांजलि अर्पित करते हुए बताया कि वे हमेशा मुझे अपने बेटे की तरह समझाते थे और जीवन की कई महत्वपूर्ण सीख भी मुझे उन्हीं के द्वारा मिली। जब भी मैं परेशान होता था तो मुझे उनसे ही प्रेरणा मिलती थी और उन्हें देखकर मैं परेशानियों से आगे निकल जाता था। उनका यूं अचानक चले जाना मेरे लिए बड़ा ही दुखद है।

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