आरक्षित वर्ग (अनुसूचित जाति-जनजाति और नि:शक्तजन) के लिए तय सीधी भर्ती के पदों पर प्रदेश में लंबे समय से नियुक्ति नहीं हो पा रही है। सरकार हर बार एक-एक साल कर अवधि बढ़ाती जा रही है। कुछ दिनों पहले ही मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह ने इस मामले में विभागों के प्रमुख सचिवों को बुलाकर स्थिति का जायजा लिया था।

इसे भी पढ़ें-  राहुल गांधी के गढ़ अमेठी में कांग्रेस का सूपड़ा साफ

बैठक में ही तय किया गया था कि भर्ती करने वाली एजेंसियों को रिक्त पदों को भरने के प्रस्ताव भेजे जाएं। सामान्य प्रशासन विभाग ने तो प्रोफेशनल एक्जामिनेशन बोर्ड (पीईबी) को प्रस्ताव भेज दिया पर बाकी विभाग ने अभी भी रफ्तार नहीं पकड़ी है। इसी बीच कैबिनेट ने बैकलॉग भर्ती के लिए समयसीमा बढ़ाकर 30 जून 2018 की थी, वो भी गुजर गई।

सूत्रों का कहना है कि अब सामान्य प्रशासन विभाग एक बार फिर इन पदों को भरने की समयसीमा एक साल और बढ़ाने का प्रस्ताव कैबिनेट में मंजूरी के लिए रखने जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई पद इसलिए खाली हैं क्योंकि जरूरी शैक्षणिक योग्यता रखने वाले पात्र उम्मीदवार ही नहीं मिलते हैं। यही वजह है कि बार-बार भर्ती की प्रक्रिया करनी पड़ती है।

इसे भी पढ़ें-  भूमि पूजन का श्रेय लेने के चक्कर मे भिड़े भाजपा विधायक और पार्षद

मुख्यमंत्री चाहते हैं जल्द हो भर्ती

सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्य सचिव सहित सभी विभागीय अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि रिक्तों पदों पर जल्द भर्ती की जाए। इसके बावजूद विभागों की कार्यवाही बेहद धीमी नजर आ रही है। राजस्व विभाग को छोड़ दें तो कोई भी विभाग ऐसा नहीं है, जिसने तय लक्ष्य के हिसाब से भर्ती की कवायद की हो। स्कूल शिक्षा विभाग को 30 हजार से ज्यादा संविदा शिक्षकों की भर्ती करनी है पर यह मामला नियम-कायदों में ही उलझा हुआ है।