WhatsApp पर टेक्स्ट मैसेज अगर लाल रंग का दिखता है, तो जानें क्या है इसका मतलब

नई दिल्ली। व्हाट्सएप पर फर्जी संदेशों की बढ़ती घटनाओं की ध्यान में रखते हुए, फेसबुक की स्वामित्व वाली कंपनी एक नई सुविधा देने जा रही है, जिससे इस प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोका जा सके। इस फीचर का नाम ‘सस्पीशियर लिंक डिटेक्शन’ है, जिसकी टेस्टिंग की जा रही है और जल्द ही इसे लॉन्च कर दिया जाएगा।

यह सुविधा वर्तमान में व्हाट्सएप के 2.18.204 बीटा संस्करण पर उपलब्ध है। जब भी कोई उपयोगकर्ता किसी थर्ड पार्टी की वेबसाइट से लिंक प्राप्त करता है, तो व्हाट्सएप वेबसाइट की प्रामाणिकता को सत्यापित करने के लिए उसकी पृष्ठभूमि जांच करेगा और अगर यह कुछ संदिग्ध पहचानता है, तो उपयोगकर्ता को चेतावनी देगा।

एक संदिग्ध वेबसाइट की पहचान करने पर व्हाट्सएप इसे लाल लेबल से मार्क करेगा। यह इस बात का संकेत होगा कि यह संदेश या तो स्पैम है या नकली वेबसाइट पर रीडायरेक्ट करेगा। फिर भी यदि उपयोगकर्ता लिंक खोलने के लिए आगे बढ़ता है, तो व्हाट्सएप उसे अंतिम बार चेतावनी देगा कि लिंक संभवतः एक संदिग्ध है।

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रिसर्च के लिए देगा 34 लाख रुपए

व्हाट्सएप ने फेक न्यूज और अफवाह फैलाने वाली खबरों पर रिसर्च करने वालों को 34 लाख रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा हाल ही में की है। कंपनी ने हाल ही में इस मामले में रिसर्च करने वाले एक्सपर्ट के लिए ग्लोबल अवॉर्ड का ऐलान किया है।

व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने बताया हम अपने यूजर्स की सुरक्षा के प्रति बेहद गंभीर हैं। ऐसे में हम इस नए प्रोजेक्ट के जरिए भारत के बड़े शैक्षिक जानकारों को साथ जोड़ने के लिए तैयार हैं।

इसके पीछे मुख्य उद्देश्य ये पता लगाने की है कि आखिर कैसे गलत जानकारी को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए फैलाया जाता है। इस रिसर्च की मदद से हम लोगों को फेक न्यूज को पहचानने और गलत जानकारी को रोकने की कोशिश करेंगे, जिससे वो फेक न्यूज को आगे बढ़ने से रोकें।

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आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 12 अगस्त 2018 है। व्हाट्सएप पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को 14 सितंबर 2018 तक ईमेल द्वारा उनके आवेदन की स्थिति पर सूचना देगा। अधिक जानकारी के लिए, आवेदक व्हाट्सएप ब्लॉग पर जा सकते हैं।

काम आई सरकार की सख्ती

बताते चलें कि मैसेजिंग ऐप पर लगातार फैलाई जा रही अफवाहों को लेकर केंद्र सरकार ने चेतावनी देते हुए नए निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने व्हाट्सएप से फेक मैसेज को चेक करने को कहा है साथ ही इसे रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने के लिए भी कहा है। सरकार के इस फैसले के बाद ने फेक न्यूज का पता लगाने के लिए बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है।

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हो चुकी हैं कई हत्याएं

गौरतलब है कि व्हाट्सऐप के भारत में 20 करोड़ से ज्यादा मंथली एक्टिव यूजर्स हैं। बीते दिनों इस ऐप के जरिये फैली फर्जी खबरों की वजह से कई लोगों की हत्या हो चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक व्हाट्सएप और फेसबुक पर तेजी से वायरल हो रहे मैसेज के कारण पिछले दो हफ्तों में लगभग 27 लोगों की जान गई है।

ये हत्याएं अलग-अलग राज्यों में हुई हैं। व्हाट्सएप पर अफवाह फैलने के बाद भीड़ द्वारा निर्दोष लोगों को निशाना बनाए जाने का पहला मामला झारखंड में आया था। मई 2017 में बच्चा चोरी की आशंका में सात लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। मृतकों में दो भाई भी थे।

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