क्रेडिट कार्ड का डाटा चुराकर ऐसे ठगी करता था पाकिस्तानी गिरोह

इंदौर। साइबर सेल ने मुंबई से ऐसे दो ठगों को गिरफ्तार किया है, जो ग्राहकों के क्रेडिट कार्ड की डिटेल रूस की एक बेवसाइट से चुराकर विदेश की वेबसाइट पर लाखों की ऑनलाइन शॉपिंग करते थे। इस गिरोह का सरगना पाकिस्तान का ठग है। वह लाहौर में बैठकर गिरोह चलाता है।

साइबर एसपी जितेंद्र सिंह के मुताबिक 27 अगस्त को उज्जैन स्थित बैंक ऑफ इंडिया के मैनेजर जयकिशन सिंह के क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर 72 हजार रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ था। जांच में पता चला कि कार्ड से ऑनलाइन शॉपिंग करने के साथ एयर टिकट भी खरीदे हैं।

उसी के आधार पर मुंबई से दो आरोपी रामकुमार नादर और रामकुमार पिल्लई को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से 25 क्रेडिट व डेबिट कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप और 8 आधार कार्ड जब्त किए गए। नादर ने गिरोह के फरार सदस्य गौरव सिंह निवासी जबलपुर का नाम उगला।

नादर व पिल्लई मूल रूप से तमिलनाडु के रहने वाले हैं। नादर बीकॉम और एमबीए की पढ़ाई कर चुका है, जबकि पिल्लई नादर का दोस्त है। दोनों इंटरनेशनल ऑनलाइन ठगी के एक गिरोह से जुड़े हैं। फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।

साइबर सेल ने 13 कार्ड होल्डर्स की सूची निकलवाई है, जिनके साथ ठगी हुई है। पिछले चार माह में 30 शिकायतें आई हैं। उनसे संपर्क किया जा रहा है।

गर्लफ्रेंड के गम में सौ किलो बढ़ा वजन

बैंक मैनेजर सिंह के रुपयों से नादर ने गर्लफ्रेंड को 66 हजार रुपए कीमत का अरमानी का सूट खरीदकर दिया था। उससे ब्रेकअप होने पर उसने शरीर पर ध्यान देना छोड़ दिया और उसका वजन 70 किलो से बढ़कर 140 किलो हो गया।

ऐसे आया ठगी का आइडिया

नादर ने पढ़ाई के बाद मुंबई में एचडीएफसी बैंक में नौकरी की थी। यहां उसे पता चला कि किसी ग्राहक के डेबिट या क्रेडिट कार्ड से विदेश में रुपए निकल जाते हैं तो बैंक उसका रुपया 14 दिन में लौटा देता है। इस पर नादर ने अपने दोस्त के खाते में रुपए जमा करवाए।

फिर उसका क्रेडिट कार्ड किसी तीसरे दोस्त को देकर बैंकॉक भेज दिया। वहां से लौटने पर बैंक में जाकर दूसरे दोस्त के जरिये साबित करवाया कि वो विदेश गया ही नहीं। इस केस में बैंक ने 46 हजार रुपए वापस कर दिए। उसके बाद वह दोस्त पिल्लई के साथ मिलकर ऑनलाइन ठगी करने लगा। पांच साल से दोनों ठगी कर रहे हैं।

बिट क्वाइन से होता था पेमेंट

नादर को रूस की एफई नामक वेबसाइट पर भारतीय बैंक ग्राहकों के डेबिट व क्रेडिट कार्ड की डिटेल मिलती थी। हैकर उसे डिटेल उपलब्ध करवाते थे। इसके बदले नादर 12 डॉलर तक देकर उसे खरीद लेता था। इसका पेमेंट बिट क्वाइन से होता था। ग्राहकों के कार्ड की डिटेल लेने के बाद ठग कुछ ऐसी बेवसाइट पर ऑनलाइन शॉपिंग करते थे, जिसमें ओटीपी नंबर की जरूरत नहीं पड़ती थी।

डार्कनेट वेबसाइट पर मिला पाकिस्तानी ठग

नादर के गिरोह का मास्टरमाइंड सरगना पाकिस्तान का शेख अफजल है, जो लाहौर से ऑनलाइन ठगी की वारदातें करता है। शेख से उसकी मुलाकात डार्कनेट बेवसाइट पर हुई थी। उसी ने ऑनलाइन ठगी के गुर सिखाए। नादर को कुछ समय तक शेख सस्ते दामों में विदेश की एयर टिकट उपलब्ध कराता रहा। बाद में शेख ने एक अकाउंट मुहैया करवाया, जहां पर हैकर्स द्वारा हैक किए गए सैकड़ों क्रेडिट व डेबिट कार्ड की डिटेल मौजूद थी।

यह है बिट क्वाइन वॉलेट

डार्कनेट पर खरीदी-बिक्री के लिए रुपयों की जरूरत नहीं होती। यहां पर बिट क्वाइन के माध्यम से पेमेंट किया जाता है। साइबर सेल के अधिकारियों ने बताया कि आज की स्थिति में एक बिट क्वाइन की कीमत 3.64 लाख रुपए है। बदमाशों ने क्रेडिट व डेबिट कार्ड की खरीदारी के लिए बिट क्वाइन वॉलेट भी बना लिया था।

यह है डार्कनेट

एसपी ने बताया कि डार्कनेट वेबसाइट पर अवैध हथियार, देह व्यापार और ड्रग्स का धंधा फलता-फूलता है। इसे इस्तेमाल करने वाले अपराधी होते हैं। पहले सिल्क रूट नाम से डार्कनेट की शुरुआत हुई थी। बाद में एफबीआई ने इस पर पाबंदी लगवा दी।

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