इस सोमवार हर मां करे ये काम, संतान के सभी कष्ट होंगे दूर

धर्म डेस्क।सोमवार दिनांक 16.10.2017 को कार्तिक कृष्ण बारस के उपलक्ष्य में गोवत्स द्वादशी पर्व मनाया जाएगा। गौवत्स द्वादशी में प्रदोष व्यापिनी तिथि को ग्रहण किया जाता है। गाय-बछड़े की अनुपलब्धता में गीली मिट्टी से बने गौवत्स को पूजा जाता है। गौधूली बेला में गाय व बछड़े का पंचोपचार पूजन कर भिगोई हुई चना दाल, मूंग, मोठ व बाजरे से भोज कराया जाता है। इस व्रत में गेहूं चावल व गाय के दूध का सेवन वर्जित है अतः काकून के चावल से पूजा करके मंत्राक्षत दिया जाता है। इस विशेष पूजन, व्रत व उपाय से सभी सुखों की प्राप्ति होती है। निसंतान दंपत्ति को संतान प्राप्ति होती है तथा संतान के सभी कष्ट दूर होते हैं।

ज्योतिषीय संदर्भ: ज्योतिषशास्त्र के पंचांग खंड अनुसार सोमवार 16.10.2017 को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की प्रदोष व्यापिनी द्वादशी तिथि सम्पूर्ण दिन-रात रहेगी। सोमवार के दिन चंद्रमा के सिंह राशि व शुक्र के नक्षत्र पूर्वाफाल्गुनी में रहने से शुक्ल नाम का शुभ योग शाम 19:25 तक रहेगा। प्रदोष का समय शाम 17:46 से रात 20:18 तक रहेगा। इस समय तैतिल नमक करण रहेगा जो श्रम से सफलता का सूचक है। गौधूलि बेला रहेगी शाम 16:25 से शाम 19:25 तक।

अतः पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त शाम 17:00 से लेकर शाम 19:00 तक रहेगा। दिशाशूल पूर्व और राहुकाल का वास वायव्य में रहेगा। अतः पूजन हेतु सर्वश्रेष्ठ दिशा ईशान रहेगी। शाम में श्रीकृष्ण संग गौवत्स का पंचोपचार पूजन करें। नारियल तेल का दीपक करें, चंदन से धूप करें, सफ़ेद फूल चढ़ाएं, लाल चंदन से तिलक करें, काकून के चावल चढ़ाएं तथा भिगोई हुई चना दाल, मूंग, मोठ व बाजरे का भोग लगाएं। पूजन के बाद गाय व बछड़े को भोग खिलाएं।

विशेष पूजन मंत्र जाप ॐ श्रीवत्स-कौस्तुभ-धराय नमः॥

सुख प्राप्ति हेतु श्रीकृष्ण पर लौकी चढ़ाकर सफ़ेद गाय को खिलाएं।

संतान के कष्ट दूर करने हेतु काली गाय को पांच बेसन के लड्डू खिलाएं।

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