आरुषि तलवार की दोस्त ने तोड़ी चुप्पी, उठाए ऐसे सवाल

नोएडा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को नौ साल पुराने नोएडा के आरुषि-हेमराज मर्डर केस में तलवार दंपती को बरी कर दिया। सीबीआई कोर्ट ने आरुषि के पैरेंट्स राजेश और नूपुर तलवार को 2013 में उम्रकैद सुनाई थी। तब से वो जेल में थे। उन्होंने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में पिटीशन दायर की थी।

आरुषि तलवार के क्लासमेट्स (दोस्तों) ने 2008 के नोएडा में हुए डबल हत्या के मामले में अपनी चुप्पी तोड़ी है। आरुषि के कुछ दोस्तों ने कहा कि नौ सालों से उसके चरित्र पर संदेहास्पद सवाल खड़े किए जा रहे हैं। उनका दावा है कि आरुषि के मोबाइल फोन से प्राप्त हुए सभी संदेशों को उत्तर प्रदेश पुलिस और मीडिया ने गलत तरीके से पेश किया।

जो व्यक्ति अब जीवत नहीं है, उसके चरित्र की हत्या करना सही नहीं है। आरुषि की दोस्त सहाय ने कहा कि मुझे लगता है कि मीडिया ने पूर्वाग्रह के आधार पर तेरह साल की लड़की को ऐसे पेश किया गया, जिसका हेमराज जैसे उम्रदराज व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध था।

सहाय ने कहा कि वह आरुषि की करीबी दोस्त थी क्योंकि वह भी अपने माता-पिता की एकलौती संतान थी। वह स्कूल में एक जिम्मेदार लोकप्रिय लड़की थी और पुलिस ने जैसी कहानी बताई है, आरुषि को वैसा कुछ करने की जरूरत नहीं थी।

23 साल की दोस्त ने मीडिया से सवाल किया कि यदि अंकल और आंटी ने यह नहीं किया, तो वे कौन लोग हैं, जो इस हत्याकांड में शामिल थे। सहाय ने कहा कि अभी तक की गई जांच का मकसद वास्तविक अपराधी को ट्रैक करना नहीं था। इसका मकसद यह पता करना था कि क्या उसके माता-पिता ने अपराध किया है या नहीं।

गौरतलब है कि नवंबर 2013 में राजेश और नूपुर तलवार को आरुषि की हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। मगर, कई आलोचकों ने तर्क दिया कि यह फैसला कमजोर सबूत पर किया गया था। तलवार दंपति ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी है, जिसने गुरुवार को उन्हें संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया।

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