ईद विशेष, सद्भाव की Good News यहां हिंदू धर्मावलंबी भी रखते हैं रोजे, कौमी एकता की मिसाल है ये जगह

इंटरनेट डेस्‍क। हमारे देश में सांप्रदायिक एकता के भी अच्‍छे खासे उदाहरण देखने व सुनने को मिलते हैं। यही कारण है जिसके चलते कौमी एकता का नारा बुलंद होता है।

इन दिनों रमजान का महीना चल रहा है और जल्‍द ही 30 रोजे पूरे होने वाले हैं। ईद उल फितर का त्‍योहार 15 जून को मनाए जाने की उम्‍मीद जताई जा रही है।

आइये हम आपको इस मौके पर एक सांप्रदायिक एकता की मिसाल के बारे में बताते हैं। राजस्‍थान में एक गांव ऐसा है जहां मुस्लिम के अलावा हिंदू धर्मावलंबी भी रोजे रखते हैं।

राजस्‍थान के बाड़मेर एवं जैसलमेर जिले में मेघवाल समुदाय के लोग रोजा रखने की परंपरा को लंबे समय से निभाते चले आ रहे हैं।

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भारत और पाकिस्‍तान की सीमा के निकट बसे इन गांवों में त्‍योहारों को आपस में मिल-जुलकर ही मनाया जाता है। इस समुदाय के लोग मूल रूप से राजपूत संत पिथोरा के अनुयायी हैं।
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इन संत की दरगाह पाकिस्‍तान के सिंध प्रांत में स्थित है। इसके चलते ये लोग रमजान के महीने में भी इबादत करते हैं। बताया जाता है कि रोजा रखने वाले ये हिंदू शरणार्थी लोग हैं।

ये लोग वर्ष 1965 और 1971 में हुई जंग के दौरान सीमा पार से आकर समीप के गांवों में ही बस गए थे। उसके बाद से ही यह परंपरा चली आ रही है।

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