सरकारी मंदिरों का रखरखाव अब NGO के भरोसे, जबलपुर में 62 मंदिर, कटनी के एक भी नहीं

भोपाल: प्रदेश के एतिहासिक महत्व के प्राचीन मंदिरों और देव स्थानों का जीर्णोद्धार अब राज्य सरकार खुद नहीं करेगी बल्कि यह काम स्वयंसेवी संस्था इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर हेरिटेज(इंटेक) के जरिए आउटसोर्सिंग से कराया जाएगा।
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग ने इसके लिए आदेश जारी कर दिए है। राज्य के हर सरकारी मरम्मत और रखरखाव के काम के लिए राज्य सरकार टेंडर जारी करती है। इस प्रतिस्पर्धा में आने वाली संस्थाओं में से न्यूनतम दर और राज्य सरकार की एजेंसियों के तय मापदंडों पर काम करने वाली संस्थाओं को काम दिया जाता है लेकिन इस एनजीओ को काम देने के लिए राज्य सरकारने इसे टेंडर प्रक्रिया से भी छूट दे दी है।
लोक निर्माण विभाग मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए इंटेक को कार्य की एजेंसी बनाएगा और इस संस्था से निर्माण कराएगा। इंटेक भी यह काम आउटसोर्सिंग के जरिए कराएगा। इस काम के लिए इंटेक को राज्य सरकार नौ प्रतिशत पर्यवेक्षण शुल्क भी प्रदान करेगी। यह शुल्क मंदिर, देवस्थानों की मरम्मत और रखरखाव पर आने वाले मूल खर्च के अलावा होगा। विभाग समय-समय पर जिन स्थानों के जीर्णोद्धार का निर्णय लेगा उनका विवरण इंटेक को भेजा जाएगा।
इतने मंदिर
उज्जैन-2572
देवास-867
रतलाम-1780
शाजापुर-976
आगर मालवा-737
मंदसौर-2306
नीमच-1445
इंदौर-1439
धार-1118
खरगौन-147
बड़वानी-44
झाबुआ-190
मुरैना-866
श्योपुर-624
भिंड-10
रीवा-96
शहडोल-26
दमोह-514
पन्ना-134
टीकमगढ़-610
भोपाल-26
रायसेन-377
राजगढ़-741
विदिशा-104
बैतूल-103
जबलपुर-62
छिंदवाड़ा-49
मंडला-34
बालाघाट-50
गुना-688
शिवपुरी-34
अशोकनगर-131
ग्वालियर-987

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