लक्ष्मी को तो सभी पूजते पर बहन दरिद्रा को कोई नही रखना चाहता…

धर्म डेस्क। दिवाली नजदीक आते ही हर तरफ लक्ष्मी पूजा की बात हो रही है। हर कोई वैभव और सम्पन्नता की देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि लक्ष्मीजी की एक बड़ी बहन भी थीं।   जहांहर कोई चाहता है कि लक्ष्मीजी का उसे घर में वास हो, लेकिन उनकी बड़ी बहन के सभी दूर से हाथ जोड़ते हैं यानी उन्हें कोई नहीं चाहता। आखिर क्या है बड़ी बहन की कहानी, यहां जानें।

यूं तो लक्ष्मीजी की बड़ी बहन का नाम ज्योष्ठा है, लेकिन उन्हें दरिद्रा भी कहा जाता है। कहीं-कहीं अलक्ष्मी के नाम से भी जाना जाता है। उनके दुर्गुणों के कारण उन्हें यह नाम दिया गया है। लक्ष्मीजी से ठीक विपरीत उनकी बड़ी बहन को अशुभ घटनाओं और पापियों के अलावा आलस्य, गरीबी, दुख, कुरूपता से जोड़ा गया है। इन्हें दुर्भाग्य की देवी भी कहा जाता है।

ऐसे हुई थी दरिद्रा की उत्पत्ति

धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि देवताओं और राक्षसों के बीच समुद्र मंथन के दौरान सबसे पहले विष निकला था, जिसे भगवान शिव ने अपने कंठ में ले लिया। इसके बाद लक्ष्मी और दरिद्रा निकलीं। दोनों एक-दूसरी की ओर पीठ करके बैठी थीं। यही कारण है कि दरिद्रा के गुण लक्ष्मी से ठीक उलट हैं।

लक्ष्मी का वाहन जहां उल्लू है, वहीं दरिद्रा का वाहन कौआ है। उनका विवाह एक ब्राह्मण से हुआ था। कहा जाता है कि ये नास्तिक और पापियों के घर में वास करती हैं।

दो देवियों की कहानी

लक्ष्मी और दरिद्रा के बारे में कहा जाता है कि दोनों बहुत सुदंर थीं। दोनों की इच्छा थी कि भगवान नारायण से उनका विवाह हो, लेकिन नारायण ने लक्ष्मी को चुना। यहीं से दरिद्रा के मन में लक्ष्मी के प्रति ईर्ष्या पैदा हो गई। दोनों में ठन गई। लक्ष्मीजी कहती हैं कि मैं जिसे चाहूं, धनवान बना दूं। वहीं दरिद्रा कहती हैं कि मैं जिस धनवान को चाहूं, भिखारी बना दूं। इस पर भगवान नारायण ने एक बार कहा था कि किसी का वैभवशाली या भिखारी होना उसके गुणों में निर्भर करेगा।

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