संघ लोकतांत्रिक सोच वाला संगठन: भागवत

नागपुर। पूर्व राष्ट्रपति और पुराने कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी ने बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी समेत तमाम कांग्रेस नेताओं के विरोध के बावजूद संघ मुख्यालय में तृतीय वर्ष के संघ शिक्षा वर्ग को संबोधित कर इतिहास रच दिया।

इस अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, संघ लोकतांत्रिक सोच वाला संगठन है। इसकी स्थापना डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने 27 सितंबर 1925 को नागपुर स्थित अपने घर में की थी। संघ को अक्सर हिंदूवादी संगठन कहा जाता है, लेकिन वह अपने आप को राष्ट्रवादी व सांस्कृृतिक संगठन मानता है, न कि राजनीतिक या धार्मिक संगठन। हेडगेवार कांग्रेस के आंदोलन में जेल गए थे।

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सरसंघचालक ने कहा कि सरकारें बहुत कुछ कर सकती हैं, सब कुछ नहीं। संगठित समाज से ही देश बदल सकता है। हर भारतवासी के पूर्वज एक ही हैं। वातावरण बनाने वाले लोग चाहिए। हिंदू भारत का भाग्य तय करने के लिए उत्तरदायी हैं। शक्ति के सकारात्मक उपयोग के लिए शील जरूरी है।

उन्होंने यह साफ कहा कि हमें विचारों से कोई परहेज नहीं है। प्रामाणिक लोगों में मत आड़े नहीं आते। प्रामाणिक लोगों में कोई बात आड़े नहीं आती। जो सही है, वो उस पर चलते हैं। उनके मतों की आपस की चर्चा से एक सुंदर समाज बनता है। हम सारी सज्जन शक्ति को जुटाना चाहते हैं। हमें देखने कई महापुरुष यहां आ चुके हैं। उनसे मिला पाथेय हम ग्रहण करते हैं। आप संघ को परखें। जो हमने कहा वह सही लगे तो साथ चलें।

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मोहन भागवत के अनुसार विविधता तो सुंदरता की निशानी है। लेकिन समय-समय पर एकता के दर्शन भी होते रहने चाहिए। समाज के आपस में सद्भावना रखकर चलना चाहिए। भागवत के अनुसार हम सब सत्य के पथ पर चलें, ऐसे हमारे हमारे संस्कार होने चाहिए।

इस बार के संघ शिक्षा वर्ग समापन समारोह में प्रणब मुखर्जी के आगमन से पैदा हुए विवाद पर भी मोहन भागवत ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि संघ लिए यह समारोह भी प्रतिवर्ष होने वाले समारोहों जैसा ही है। हम हर साल किसी न किसी विशिष्ट व्यक्ति को बुलाते हैं और उसके विचारों से अपना पाथेय ग्रहण करते हैं।

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