आज से अग्नि पंचक, रहे सचेत, रखें इन बातों का ध्यान

धर्म डेस्क। पंचांग के अनुसार, इस माह अशुभ पंचक 5 जून (मंगलवार) को प्रातः 04:34 से आरंभ हो रहा है। जो 9 जून (शनिवार) रात्रि 11:10 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार घनिष्ठा नक्षत्र से लेकर रेवती नक्षत्र के अंत तक का समय बेहद अशुभ माना गया है।

इसे ही पंचक कहा जाता है। पंचक (पांच दिनों) का समय साल में कई बार आता है। शास्त्रों के अनुसार पंचक के इन पांच दोनों में कोई भी जरूरी कार्य नहीं किया जाए तो बेहतर होता है। शास्त्रों में पंचक में कुछ शुभ कार्य को करने की सख्त मनाही है, ऐसा इसलिए क्योंकि अगर इस काल में आपने कोई नया कार्य शुरू किया, तो उसका फल प्राप्त नहीं होता है।

इस बार पंचक मंगलवार को शुरु होने के कारण इन्हें ‘अग्नि पंचक’ कहा जा रहा है। इन पांच दिनों में अग्नि से भय बना रहता है। मंगलवार से शुरू हुए पंचक के दौरान आग लगने का भय रहता है, जिसकी वजह से इस पंचक को शुभ नहीं कहा जा सकता। पंचक के दौरान किसी शुभ कार्य के लिए दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना बेहद अशुभ माना गया है।

इस दौरान औजारों की खरीददारी, निर्माण या मशीनरी का कार्य नहीं करना चाहिए। हां, इस दौरान कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों और अधिकार हासिल करने जैसे मसलों की पहल की जा सकती है, क्योंकि उनमें सफलता मिलने की संभावना होती है।

धनिष्ठा पंचकं त्याज्यं तृण काष्ठा-दि-संग्रहे। त्याज्या दक्षिण दिग्यात्रा गृहाणां छादनं तथा।।

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27 नक्षत्रों में अंतिम पांच नक्षत्र- धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों को पंचक कहा जाता है। ‘मुहूर्त चिंतामणि’ में उल्लेख है कि इन नक्षत्रों की युति में किसी की मृत्यु होने पर परिवार के अन्य सदस्यों को मृत्यु या मृत्यु तुल्य कष्ट का भय बना रहता है, इसलिए पंचक में दाह-संस्कार करते समय बहुत-सी सावधानियों का पालन करना होता है। शास्त्रों में पंचक के समय दक्षिण दिशा की यात्रा करना और लकड़ी का सामान खरीदना वर्जित बताया गया है।

पंचक में यदि हो मृत्यु

शास्त्रों में कहा गया है कि धनिष्ठा से रेवती तक इन पांच नक्षत्रों की युति यानी गठजोड़ अशुभ होता है। पंचक में अगर किसी की मृत्यु हो गई है तो उसके अंतिम संस्कार ठीक ढंग से न किया गया तो पंचक दोष लग सकते है।

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गरुण पुराण के अनुसार, पंचक के दौरान शव का अंतिम संस्कार करते समय किसी योग्य जानकार से पूछकर आटे या कुश के पांच पुतलों को भी अर्थी पर रखकर पूरे विधान के साथ अंतिम संस्कार करने से पंचक के दोष से मुक्ति मिलती है।

रोग पंचक

अगर पंचक का प्रारंभ रविवार से हो रहा होता है तो यह रोग पंचक कहा जाता है। इसके प्रभाव में आकर व्यक्ति शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करता है। इस दौरान किसी भी प्रकार का शुभ कार्य निषेध माना गया है।

राज पंचक

सोमवार से शुरू हुआ पंचक राज पंचक होता है, यह पंचक काफी शुभ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान सरकारी कार्यों में सफलता हासिल होती है और बिना किसी बाधा के संपत्ति से जुड़े मामले हल होते हैं।

अग्नि पंचक

पंचक मंगलवार को शुरु होने के कारण इन्हें ‘अग्नि पंचक’ कहा जा रहा है। इन पांच दिनों में अग्नि से भय बना रहता है। मंगलवार से शुरू हुए पंचक के दौरान आग लगने का भय रहता है, जिसकी वजह से इस पंचक को शुभ नहीं कहा जा सकता।

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बुधवार या बृहस्पतिवार

अगर पंचक बुधवार या बृहस्पतिवार से प्रारंभ हो रहे हैं तो उन्हें ज्यादा अशुभ नहीं कहा जाता। पंचक के मुख्य निषेध कर्मों को छोड़कर कोई भी कार्य किया जा सकता है।

चोर पंचक

ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार शुक्रवार से शुरू हुए पंचक, जिसे चोर पंचक कहा जाता है, के दौरान यात्रा नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा धन से जुड़ा कोई कार्य भी पूर्णत: निषेध ही माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान धन की हानि होने की संभावनाएं प्रबल रहती हैं।

मृत्यु पंचक

शनिवार से शुरू हुआ पंचक सबसे ज्यादा घातक होता है क्योंकि इसे मृत्यु पंचक कहा जाता है। अगर इस दिन किसी कार्य की शुरुआत की गई, तो व्यक्ति को मृत्यु तुल्य परेशानियों से गुजरना पड़ता है। शनिवार से शुरू हुए पंचक के दौरान कोई भी जोखिम भरा कार्य नहीं करना चाहिए। व्यक्ति को चोट लगने, दुर्घटना होने और मृत्यु तक की आशंका रहती है।

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