Laila Khan हत्याकांड: आधी रात तक Farm House में गूंजा संगीत, फिर चीखें

लैला एक कहानी। कैसे हुई थी पाकिस्तान मूल की एक्ट्रेस लैला खान और उसके परिवार की हत्या? सौतेले बाप ने महसूस किया कि लैला और उसका परिवार उसके साथ विश्वासघात कर रहा है तो उसने और बड़ा विश्वासघात करते हुए दिया नृशंस हत्याकांड को अंजाम.

लैला खान

लैला के सामने एक सुनहरा भविष्य था. फिल्मी जीवन से लेकर निजी जीवन तक उसकी कई योजनाएं थीं. चकाचौंध की ज़िंदगी जीने वाली इस खूबसूरत और जवान अदाकारा की ज़िंदगी में फरवरी 2011 की एक रात ऐसा अंधेरा बनकर आई कि जिसकी कोई सुबह नहीं थी. 7 फरवरी 2011 को अपने पूरे परिवार के साथ लैला जब छुट्टियां मनाने निकली तो उसके बाद न तो मुंबई ने उसे फिर कभी देखा और न खुद लैला कभी मुंबई लौट सकी.

7 फरवरी 2011 को लैला अपने पूरे परिवार के साथ मुंबई से इगतपुरी अपने फार्म हाउस पर छुट्टियां मनाने निकली थी. लेकिन यह कहानी यहां से शुरू नहीं होती. कहानी शुरू होती है करीब छह महीने पहले से जब लैला और उसकी मां सलीना अपने भविष्य की कुछ योजनाओं को आकार देने की शुरुआत कर रहे होते हैं.

सलीना का तीसरा पति था परवेज़ जो सलीना से उम्र में करीब दस साल छोटा था. परवेज़ ने सलीना से पागलों जैसा प्यार किया था जिसे देखकर सलीना भी उसकी हो गई थी. लेकिन दो साल की शादी में परवेज़ के प्यार की वजह सलीना की दौलत होना सामने आने लगा था. परवेज़ के पास दौलत कमाने का कोई खास या रेगुलर ज़रिया नहीं था और ऐसे में वह अपनी ज़िंदगी में दौलत के लिए एक तरह से सलीना पर ही डिपेंड करता था.

जैसे अतीत पीछा नहीं छोड़ता वैसे ही, सलीना की ज़िंदगी में उसका दूसरा पति आसिफ लौट चुका था. सलीना इस वक्त पेशे से बिल्डर आसिफ की तरफ झुक रही थी. अपना फार्म हाउस और इगतपुरी की प्रॉपर्टी का सौदा करने के लिए भी वह आसिफ की मदद लेने लगी थी. सलीना ने पावर आॅफ अटॉर्नी भी आसिफ के फेवर में बनाने का फैसला कर लिया था. इसी सब के बीच, परिवार के सभी सदस्यों के पासपोर्ट और वीज़ा वगैरा की तैयारियां भी चल रही थीं.

लैला खान

असल में, लैला की शादी इसका कारण थी. लैला दुबई के रहने वाली मुनीर से शादी करने के बाद पूरे परिवार के साथ दुबई शिफ्ट होने का प्लान बना रही थी. सलीना और पूरे परिवार को इसकी खबर भी थी और सभी इन खुशियों में मशगूल भी थे, सिवाय परवेज़ के. परवेज़ के दुबई शिफ्ट होने को लेकर कोई ज़िक्र नहीं था. परवेज़ को लगने लगा था कि सब उसे यहीं अकेले छोड़कर दुबई जाने का मन बना चुके हैं.

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इधर, सलीना के साथ आसिफ के बढ़ते रिश्तों को लेकर भी परवेज़ ऐतराज़ जता चुका था जिस पर सलीना कह चुकी थी कि वो उसकी ज़िंदगी का मालिक बनने की कोशिश न करे. और भी ताने सुन चुका था परवेज़ उस दौरान जब सलीना ने अपनी सारी संपत्ति को ठिकाने लगाकर शिफ्ट हो जाने के इशारे दे दिए थे. अब परवेज़ को यकीन सा होने लगा था कि ये पूरा परिवार न तो उसको आगे साथ रखने वाला है और न ही उसके लिए फूटी कौड़ी तक बचने वाली है.

परवेज़ की नज़र में यह उसके साथ विश्वासघात था. इस तरह सोचते हुए उसने भी विश्वासघात करने का मन बना लिया. परवेज़ ने अपने एक आदमी शाकिर को किसी तरह ज़िद करके इगतपुरी के फार्म हाउस का चौकीदार बनवा दिया. परवेज़ को पता था कि यह फार्म हाउस भीड़ भाड़ से अलग शांत जगह और यहां सब कभी—कभी आते हैं तो यहां उसे एक न एक दिन मौका मिलेगा.

लैला खानऔर फिर आई 2011 की फरवरी. राजेश खन्ना की हीरोइन के तौर पर एक फिल्म में काम कर चुकी लैला का पूरा परिवार मुंबई में इकट्ठा हुआ. खूब शॉपिंग हुई और फिर सबने सोचा कि कुछ दिनों के लिए फार्म हाउस पर जाकर पार्टी की जाए. 7 फरवरी को पूरा परिवार दो एसयूवी गाड़ियों में इगतपुरी रवाना हुआ. जो गाड़ी खुद लैला ड्राइव कर रही थी, उसमें सलीना और लैला की बहन हशमीना के साथ परवेज़ भी बैठा था. इस गाड़ी में एक लोहे की रॉड रखी हुई थी जिसका ज़िक्र निकला तो परवेज़ ने कहा कि रास्ते में कभी भी ज़रूरत पड़ सकती है इसलिए कोई औज़ार होना चाहिए. दूसरी गाड़ी में लैला का भाई इमरान और दो बहनें ज़ारा और रेशमा थीं.

शाम तक सभी फार्म हाउस पहुंच चुके थे. लेकिन चूंकि सभी सफर की थकान में थे इसलिए अगले दिन पार्टी करने की प्लानिंग हुई. इस दिन केवल मौज मस्ती हुई. घर के लोग कैमरों से एक-दूसरे की तस्वीरें खींचते रहे और वीडियो बनाते रहे. लैला अपनी दो पर्शियन बिल्लियों के साथ भी मस्ती करती रही. अगली शाम तक पार्टी का तमाम इंतज़ाम हो चुका था और उधर, दिन भर में परवेज़ ने शाकिर के साथ मिलकर कुछ बातें तय कर ली थीं.

तेज़ आवाज़ में म्यूज़िक बजता रहा. जाम छलकते रहे और खाना पीना चलता रहा. देर रात करीब एक बजे तक सब थक कर अपने अपने कमरों में सोने चले गए. सलीना के बेडरूम में परवेज़ साथ था और वहां दोनों शराब पी रहे थे.

इसी दौरान, परवेज़ ने अपने मन में चल रही उधेड़बुन को नाराज़गी के साथ सलीना के सामने रखा. उसे दुबई क्यों नहीं ले जाया जा रहा, उसके मना करने पर भी आसिफ के साथ इतनी अंतरंगता क्यों है? जैसे सवाल परवेज़ ने गुस्से में रखे तो सलीना भी भड़क गई और परवेज़ को ताने देते हुए चिल्लाने लगी. बस यही तैश पहले से तैयारी किए बैठे परवेज़ के लिए ट्रिगर बन गया और उसने लोहे की रॉड सलीना के सिर पर दे मारी. सलीना एक चीख के बाद खामोश हो गई लेकिन चीख किसी ने सुन ली थी.

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इमरान और ज़ारा अपनी मां सलीना के कमरे की तरफ पहुंचे तो पीछे से शाकिर ने इमरान के सिर पर वार किया. परवेज़ ने ज़ारा को उसी रॉड से मारा. अब दो चीखें सुनकर लैला और उसकी दोनों बहनें वहां पहुंची तो परवेज़ और शाकिर ने मिलकर उन पर भी वैसे ही हमले कर सबको ख़ामोश कर दिया. जिस फार्म हाउस में कुछ देर पहले तक संगीत गूंज रहा था, अब चीखों के बाद वहां लैला समेत छह लाशें खामोश पड़ी हुई थीं.

परवेज़ ने एक ड्रिंक बनाया और पीने लगा तो शाकिर ने पूछा कि अब लाशों का क्या करना है. परवेज़ ने शाकिर की तरफ घूरकर देखा. थोड़ी ही देर बाद दोनों फार्म हाउस के पीछे गए और यह तसल्ली करने के बाद कि कोई देख नहीं रहा है, दो गहरे गड्ढे खोदे. फिर दोनों ने अंदर आकर सभी लाशों को चादरों, गद्दों में लपेटा. थोड़ा-बहुत खून जो इधर-उधर गिरा था, उसे साफ किया. एक-एक करके लाश को उन दो गड्ढों में डाल दिया.

लैला खान

दोनों गड्ढों में तीन-तीन लाशें डालने के दौरान जिसके शरीर से जो जूलरी गिरी, उसे भी आनन फानन में गड्ढों में डाल दिया. इन गड्ढों को अच्छी तरह पाटा. इनमें मिट्टी भरने के साथ ही पत्थर वगैरा भी ऐसे भरे गए कि कोई जानवर किसी तरह इन गड्ढों को खोल न पाए. दोनों की वहशत यहीं नहीं रुकी. इस फार्म हाउस में उस वक्त बिजली का कनेक्शन नहीं था. इसलिए जनरेटर में से डीज़ल निकालकर फार्म हाउस के एक हिस्से को दोनों ने जला दिया ताकि बचे-खुचे सबूत भी नष्ट हो जाएं.

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फिर तुरंत दोनों लैला की एसयूवी लेकर पहले मुंबई गए और ओशिवरा के मकान में जाकर पहले साफ सफाई कर सबूत मिटाए. उसके बाद उसी गाड़ी से दोनों जम्मू चले गए. परवेज़ जम्मू का ही था जो पहले वहां जंगलात के ठेकेदार के बतौर काम करता था.

डेढ़ साल बाद फार्म हाउस ने उगले कंकाल

किसी को कोई खबर नहीं थी कि लैला और उसका पूरा परिवार कहां गायब हो गया. लैला के पहले पति ने एक मिसिंग रिपोर्ट ज़रूर दर्ज करवाई थी जिसकी कार्यवाही के दौरान परवेज़ से पूछताछ हुई तो उसने कहा कि वो सब दुबई चले गए हैं. इससे ज़्यादा उसे कुछ नहीं पता. लेकिन इस हत्याकांड के करीब 17 महीने बाद जुलाई 2012 में परवेज़ जब एक धोखेबाज़ी के मामले में पकड़ा गया तब उससे पूछताछ हुई तो उसने लैला और उसके परिवार को मार डालने का जुर्म कबूल किया.

लैला खान

फिर परवेज़ की निशानदेही पर इगतपुरी के उस फार्म हाउस पर जाकर वो कब्रेें खोदी गईं तो छह कंकाल निकले. इनकी जांच करवाई गई. परवेज़ के बार-बार बयान बदलने के कारण और इक्का दुक्का कहानियां भी सामने आईं.

कुछ और थ्योरीज़ भी रहीं चर्चा में

इस मामले में परवेज़ पर कुछ और आरोप भी लगते रहे हैं. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि परवेज़ के लिंक आतंकवादी संगठन लश्कर के साथ रहे. लैला के किसी आतंकवादी संगठन से जुड़ने संबंधी रिपोर्ट्स भी आईं. दूसरी तरफ, परवेज़ पर यह आरोप भी लगा कि वह लैला और उसकी बहनों को दुबई में वेश्यावृत्ति करने की साज़िश कर रहा था. बाद में, परवेज़ ने हत्याएं करने से इनकार भी किया.

इसके अलावा, एक थ्योरी यह भी रही कि लैला और उसके परिवार की हत्या आसिफ शेख ने करवाई. प्रॉपर्टी विवाद के चलते शेख पर यह इल्ज़ाम लगा. इस केस में शेख को भी संदिग्ध मानते हुए जांच और केस की सुनवाई जारी है.

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