आंखों पर पट्टी बांध सुनाई कथा, गोल्डन बुक में दर्ज हुआ नाम

खरगोन। आंखों पर पट्टी बांधकर कथा सुनाने और कथा में संगीत दे रहे दृष्टिहीन टीम के सदस्यों को गुरुवार को गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड की टीम ने सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। श्रीराम धर्मशाला में चल रही शिवपुराण कथा का वाचन ओंकारेश्वर कोठी के संत शिवम भारती कर रहे हैं। कथा में संगीत कोलकाता की भारतेंदु अंध आश्रम की दृष्टिहीन सदस्यों द्वारा दिया जा रहा है।

यह धार्मिक आयोजन अपने आप में अनोखा है। गुरुवार को कथा का दूसरा दिन था। दोपहर 1 बजे कथा शुरू हुई। आयोजन में गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड के एशिया हेड मनीष विश्नोई भी शामिल हुए थे। उन्होंने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी ने आंखों पर पट्टी बांध कथा सुनाई है। इसके अलावा संगीत टीम के सभी सदस्य भी दृष्टिहीन थे। कथा वाचक शिवम भारती व संगीत टीम की जुगलबंदी का यह पहला आयोजन है।

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विश्नोई ने शिवम भारती सहित दृष्टिहीन टीम और शिवकथा आयोजन सार्वजनिक समिति को कथा समापन पर सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। सर्टिफिकेट प्राप्त होने के बाद संबंधितों का नाम गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हो गया।

कोलकाता से आए भारतेंदु अंध आश्रम के अध्यक्ष हरि व्योम ने बताया कि कथा में हारमोनियम पर बापी चक्रवर्ती व ढोलक व तबले पर संगत संतूदास व सिचू पांडे ने दी है। झांझ मंजीरों, ढपली व कोरस की भूमिका में कृष्णा भट्टाचार्य, तापस शाह, तपन माबलिक, राजेश पांडे, नंदलाल मौल, कार्तिक मुर्मू है। गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट प्राप्त होने पर टीम के सदस्यों ने खुशी दिखाई दी। वहीं आयोजन समिति के सदस्यों ने भी हर्ष जताया।

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