प्रदेश के एक तिहाई जिले घोषित हो सकते हैं सूखाग्रस्त

भोपाल। प्रदेश के करीब एक तिहाई जिले सूखाग्रस्त घोषित हो सकते हैं। इसमें औसत 25 फीसदी से कम बारिश के साथ भू-जल स्तर में कमी, नमी और बोवनी के रकबे को आधार बनाया जा रहा है। सूखाग्रस्त घोषित होने वाले क्षेत्रों में ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग की संख्या ज्यादा बताई जा रही है।

सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए मंगलवार को मंत्रालय में मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय सूखा निगरानी समिति की बैठक हुई। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार को सूखे को लेकर एलान कर सकते हैं।

प्रदेश में इस बार मानसून कमजोर रहा है। करीब 27 जिलों में औसत से कम बारिश दर्ज की गई है। ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। टीकमगढ़ को सूखाग्रस्त घोषित करने को लेकर किसान आंदोलन तक हो चुका है।

कृषि उत्पादन आयुक्त की समीक्षा बैठकों में बोवनी का रकबा घटने की बात सामने आ रही है। वहीं, कई विकासखंडों में भू-जल स्तर में गिरावट दर्ज हुई है। 23 विकासखंडों में पांच मीटर, 29 में 3 से 5, 145 में 1 से 3 मीटर तक भू-जल स्तर में गिरावट हुई है। सूत्रों के मुताबिक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिलों से आई रिपोर्ट पर विचार किया गया।

इसमें भिंड, शिवपुरी, ग्वालियर, अशोकनगर, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़ और विदिशा जिले की स्थिति काफी खराब आंकी गई है। इसके अलावा श्योपुर, मुरैना, दतिया, भोपाल, उमरिया, मंडला, जबलपुर, नरसिंहपुर, बालाघाट, शाजापुर, सीहोर, बैतूल, हरदा सहित अन्य जिलों को भी अल्पवर्षा से प्रभावित माना गया है।

अंदर की खबर बाहर न जाए

सूत्रों के मुताबिक बैठक में सभी अधिकारियों को मुख्य सचिव ने ताकीद किया कि अंदर की खबर बाहर नहीं जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ही इस मामले में अधिकृत तौर पर बाहर बोलेंगे। इसके बाद ज्यादातर अधिकारियों ने चुप्पी साध ली। एक अधिकारी ने बताया कि गोपनीयता के मद्देनजर बैठक में प्रमुख सचिव स्तर से कम के अधिकारियों को कुछ देर बाद बाहर कर दिया गया था।

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