पांच मिनट के काम भी अब 15 मिनट में होने की जिद कर रहे..!

इसी बहाने(अाशीष शुक्‍ला)। मौसम, राजनीति और 15 मिनट का तालमेल काफी सुहावना है। जैसे 15 मिनट में बदले मौसम की भविष्यवाणी अक्सर गलत हो जातीं है, वैसे ही 15 मिनट में राजनीति की भविष्यवाणी को कोई भी सही-सही नहीं बता पाता। खास बात यह भी है कि दोनो ही मामलों में परिणाम का पता जब तक चलता है तब तक 15 मिनट में सब कुछ समाप्त हो जाता है।

राजनीतिक खास तौर पर चुनाव परिणाम भी 15 मिनट की आंधी की तरह आते और कई का सब कुछ उजाड़ कर चले जाते हैं। फर्क इतना कि 15 मिनट की मौसमी आंधी तूफान ज्यादातर उजाड़ती ही हैं जबकि चुनावी राजनीति और परिणाम के 15 मिनट की आंधी कुछ को बसाती भी है। आप भी सोच रहे होंगे कि हम सिर्फ 15 मिनट पर ही क्यों ठहरे हैं? तो जब पूरा देश ही 15 मिनट के पीछे पड़ा है तो भला हम इस समय को कैसे भूल जाते।
भरी गर्मी कर्नाटक का रण फिलहाल सूर्य की तपिश की भांति नित नए बयानों से राजनीतिक गलियारों में भरपूर गर्मी का अहसास करा रहा है। तभी तो इस देश को कल तक 15 मिनट में काम करने के मुहावरे के बीच बयान और टिप्पणी से माहौल पूरी तरह से गर्म है। 15 मिनट वैसे तो पूरे दिन के 24 घण्टे में कहीं गुम से रहते हैं, लेकिन इन 15 मिनट ने फिलहाल देश को अहसास दिला दिया कि आखिर 15 मिनट कितने कीमती होते हैं।

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कोई 15 मिनट हिंदी बोलने की चुनौती पेश कर रहा है तो कोई 15 मिनट बहस करने की बात कर रहा है। आज समझ में आया कि हमारे जीवन मे 15 मिनट का कितना बड़ा स्थान है। अब तक कहीं भी लिखा दिखता था कि फलां काम सिर्फ 15 मिनट में होता है तब लोगों को कम ही यकीन होता था कि 15 मिनट में भला इतना बड़ा काम कैसे हो सकता है? आज समझ मे आया कि 15 मिनट में तो सब कुछ हो सकता है। देश में 15 मिनटों के अंदर ही इस 15 मिनट ने सुर्खियां हासिल कर लीं।

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आलम तो यह है कि इससे नाराज 5 और 10 मिनट ने अपना विरोध दर्ज करने तक की ठान ली है। कई कम्पनियों के स्लोगन में 10-5 मिनट में किये जाने वाले काम को आनन-फानन बदल कर 15 मिनट कर दिया गया है। सरकारें भी सोच रहीं हैं कि अधिकांश कार्यों की तय समय सीमा घटा या फिर बढ़ा कर 15 मिनट ही कर दी जाए। वास्तव में हमारा देश निराला है। वैसे तो यहां हमेशा ही एक-एक मिनट कीमती कहा जाता है, लेकिन यह 15 मिनट इतने कीमती हो जाएंगे किसी ने नहीं सोचा था।

आज आलम यह है कि मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक इस 15 मिनट की खातिर लोग अपना घण्टों बर्बाद कर रहे हैं । टीआरपी यह कि इस महज 15 मिनट के सब्जेक्ट की खातिर कई-कई घण्टे की चर्चा चल रहीं हैं। अब तक कई काम जो सिर्फ 5 मिनट में होते थे आज वे भी 15 मिनट में होने की जिद करने लगे हैं। वास्तव में आज 15 मिनट का महत्व दुनिया ने जाना है। कहना अतिशयोक्ति नहीं कि भारत देश को अब तक दुनिया को शून्य देने सम्मान प्राप्त थाए आज 15 मिनट देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। सचमुच दुनिया को 15 मिनटों का महत्व बताने के लिए देश के माननीयों का आभार। उम्मीद है आप भी इसी बहाने 15 मिनट का समय निकाल कर जरूर ही इस अनूठे वक्त का अहसास कर पाएंगे।

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