Whatsapp पर चल रहा था चाइल्ड पॉर्न का इंटरनेशनल रैकेट, MP से तीन गिरफ्तार

धार। प्रदेश पुलिस ने चाइल्ड पॉर्नोग्राफी के एक अंतरराष्ट्रीय रैकेट का पर्दाफाश किया है. यह रैकेट एक वॉट्सऐप ग्रुप से चल रहा था, जिसमें पूरी दुनिया से करीब 250 लोग जुड़े थे. इनमें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के भी चार लोग शामिल थे. इस ग्रुप में बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री शेयर की जाती है.

इंटेलिजेंस आईजी मकरंद देसुकर ने बताया कि पुलिस ने जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें से एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट है जो एक अच्छी कंपनी में काम करता है, वहीं दूसरा 12वीं का छात्र है और तीसरा ट्रेडर से पत्रकार बना एक व्यक्ति है. ये तीनों धार जिले से हैं।
यहां से पिछले दिनों नाबालिग बच्चों के यौन शोषण की कई घटनाएं सामने आई हैं. इनमें चार महीने की बच्चे रेप और हत्या की घटना भी शामिल है.शुरुआत में इस ग्रुप का नाम ‘किड्स सेक्स वीडियो ओनली’ था, जिसे बाद में बदलकर ‘चाइल्ड पॉर्न ओनली’ कर दिया गया. इस मामले की जांच इंदौर साइबर सेल कर रही है।
सेल के एक अधिकारी ने बताया, ‘इस ग्रुप का एडमिन एक कुवैती है और इस ग्रुप के 130 से ज्यादा सदस्य भारतीय हैं, वहीं 80 से ज्यादा सदस्य पाकिस्तानी हैं.’ इस ग्रुप के ज्यादातर सदस्य पश्चिमी एशिया के हैं, वहीं कुछ दक्षिण अमेरिका के भी हैं.एक अधिकारी ने बताया कि इस ग्रुप में शेयर किये जाने वाले ज्यादातर वीडियो 6 से 8 साल के लड़के-लड़कियों के साथ यौन शोषण के होते हैं.अधिकारियों ने बताया कि जिस इंजीनियरिंग छात्र को गिरफ्तार किया गया है वह अन्य सोशल मीडिया ग्रुप्स में भी चाइल्ड पॉर्न के वीडियो शेयर करता था. वहीं जिस नाबालिग को पुलिस ने पकड़ा है वह अपने फोन में एक ऐसे ऐप का इस्तेमाल करता था जिसकी मदद से एक ही फोन पर दो अलग-अलग नंबरों से वॉट्सऐप चलाए जा सके. इनमें से एक का इस्तेमाल वह चाइल्ड पॉर्न ग्रुप के लिए करता था और दूसरे से वह अपने परिवार-दोस्तों से बात करता था।
तीनों से पूछताछ करने वाले एक अधिकारी ने बताया कि ये तीनों युवक सेक्स के आदि बन चुके थे. उन्होंने कहा कि तीनों की हालत ऐसी हो गई है कि जरा भी मौका मिलने पर वे यौन अपराध को अंजाम दे सकते हैं.मध्य प्रदेश के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने एक सर्वे का हवाला देते हुए कहा था कि पॉर्न साइट्स की वजह से नाबालिग युवक गलत रास्ते पर जा रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘हमने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि इसके खिलाफ कड़े कानून बनाए जाएं और 25 पॉर्न वेबसाइट्स को ब्लॉक किया जाए.’भोपाल के मनोवैज्ञानिक डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी ने कहा कि बच्चों में सेक्स एजुकेशन की कमी और पॉर्न तक उनकी आसान पहुंच के चलते रेप और यौन शोषण की घटनाएं बढ़ रही हैं. उन्होंने कहा, “पॉर्न सेक्स के नाम पर क्रूरता को बढ़ावा देता है और कई बार वह इनसेस्ट (परिवार के सदस्यों से अनाचार) को भी उचित ठहराता है.
”मध्य प्रदेश में चाइल्डलाइन की डायरेक्टर अर्चना सहाय का भी कहना है कि बच्चे बिना किसी परेशानी के पॉर्न साइट्स तक पहुंच सकते हैं और इसके चलते ही महिलाओं के साथ यौन शोषण की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं. आमतौर पर पॉर्न से प्रभावित लड़कों के लिए छोटी लड़कियां ईजी टारगेट होती हैं. हालांकि उनका कहना है कि पॉर्न वेबसाइट्स को बैन करना इसका समाधान नहीं है, क्योंकि इंटरनेट ऐसी चीजों से भरी पड़ी है. वह कहती हैं कि स्कूलों और घरों में बच्चों को सेक्स को लेकर सही तरीके से जानकारी देने से इसका समाधान निकल सकता है।
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