सोनीपत सीरियल ब्लास्ट में टुंडा दोषी, उम्रकैद व एक लाख का जुर्माना

सोनीपत। 1996 में हुए सीरियल बम ब्लास्ट मामले में हरियाणा की कोर्ट ने आतंकी अब्दुल करीम टुंडा को उम्रकैद और एक लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। इससे पहले हुई सुनवाई में कोर्ट ने टुंडा को दोषी करार दिया था।

जुर्माना नही देने पर एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। सजा का फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. सुशील गर्ग की अदालत ने सुनाया।

फिलहाल टुंडा को सोनीपत के जिला कारागार में रखा गया है। इस मामले में दो आरोपियों को कोर्ट ने पूर्व में ही सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।

ज्ञात हो कि आतंकी टुंडा पर सोनीपत में 28 दिसंबर 1996 को बम विस्फोट करने का आरोप था। उस दिन शाम के समय पहला धमाका बस स्टैंड के पास पास हुआ था, जबकि इसके दस मिनट बाद दूसरा धमाका गीता भवन के पास हुआ था। इसमें करीब एक दर्जन लोग घायल हुए थे।

पुलिस ने मामले में पिलखुवा, गाजियाबाद निवासी अब्दुल करीम टुंडा व उसके साथी पिलखुवा के ही शकील अहमद और दिल्ली के तेलीवाड़ा क्षेत्र निवासी मोहम्मद आमिर खान उर्फ कामरान को नामजद किया था। दिल्ली पुलिस ने टुंडा को अगस्त 2013 में नेपाल की सीमा से गिरफ्तार किया था।

पाकिस्तान भाग गया था टुंडा –

सुनवाई के दौरान जिला अदालत में टुंडा ने बयान दिया था कि सोनीपत में हुए बम विस्फोट के दौरान वह पाकिस्तान में था। उसका कहना था कि 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों में उसका नाम आया था, जिसके बाद वह बिना अनुमति से 1994 में नेपाल भाग गया था और वहां से बांग्लादेश पहुंचा। यहां फर्जी पासपोर्ट बनाकर वह सऊदी अरब होते हुए पाकिस्तान पहुंच गया था और 1996 में भी पाकिस्तान में ही था।

बम बनाने में माहिर था टुंडा –

अब्दुल करीम टुंडा बम बनाने में माहिर था। पुलिस अधिकारी बताते हैं कि बम बनाने के दौरान ही हुए एक हादसे में उसका बायां हाथ जख्मी हो गया था, जिसके बाद उसे काटना पड़ा था। इसी के बाद ही उसे टुंडा उपनाम मिला था और वह इसी नाम से मशहूर हो गया। टुंडा ने सबसे पहले पोटाश, चीनी और एसिड की मदद से बम बनाने का तरीका सीखा और इसी तरह की देशी चीजों से बम बनाने में माहिर हो गया था।

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