प्रदेश की राजनीति का केंद्र बना जबलपुर, पहुंचे कांग्रेस के दिग्गज, 10 हजार वकील लेंगे सदस्यता

जबलपुर।  मध्यप्रदेश की स्थापना होने के बाद तक देश व प्रदेश की राजनीति का केन्द्र रहे जबलपुर में फिर वैसा ही माहौल बनता दिखाई दे रहा है। इस सप्ताह जबलपुर में भाजपा और कांग्रेस के दिग्गजों का जमघट लगने जा रहा है। राजनीति के पंडित इसका अलग अर्थ निकाल रहे हैं। इनका मानना है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों की ही नजर विंध्य और महाकोशल की सीटों पर है। विधानसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए महाकौशल पर फोकस करने भाजपा ने जबलपुर के सांसद राकेश सिंह को ही प्रदेश संगठन की कमान सौंप दी है, तो कांग्रेस ने महाकौशल के केंद्र बिंदु जबलपुर से आज संविधान बचाओ यात्रा के समापन के बहाने अपनी चुनावी तैयारियों का बिगुल फूंक दिया। दिग्गजों के जमावड़े के माध्यम से पार्टी चुनाव के पहले कार्यकर्ताओं में एकता का संदेश देने को आतुर नज़र आई। राज्यसभा सांसद विवेक तनखा के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में दिग्गज नेता कमलनाथ, पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद, सांसद कांतिलाल भूरिया, पूर्व मंत्री सुरेश पचौरी दोपहर तक जबलपुर पहुंच चुके थे। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव के भी जबलपुर पहुंचने की खबर है। मदनमहल के दद्दा परिसर में आयोजित कार्यक्रम के चलते बड़ी संख्या में कांग्रेसजनों का मेला लगा था। संभागभर से वकील भी कार्यक्रम में पहुंचे।

भाजपा को किला बचाने की चुनौती

एक तरफ भाजपा के पास अपने मजबूत किले को बचाने की चुनौती है, तो वहीं कांग्रेस इस किले को नेस्तनाबूद करने की तैयारी में जुटी है। कांग्रेस और भाजपा के कार्यक्रमों और इनमें दिग्गजों की शिरकत को इसी नजरिए से देखा जा रहा है। राज्यसभा सांसद व कांग्रेस लीगल सेल के चेयरमेन विवेक तन्खा ने तो यहां तक ऐलान कर दिया है कि 21 अपै्रल से होने जा रहे कांग्रेस लीगल सेल के विधिक विमर्श 2018 कार्यक्रम में करीब 10 हजार वकील कांग्रेस ज्वाइन करेंगे। उनके इस ऐलान ने भाजपा में खलबली मचा दी है। भाजपा अपने स्तर पर डेमेज कंट्रोल में जुट गई है।

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राज्यसभा सांसद, कांग्रेस की लीगल सेल व आईटी सेल के चेयरमेन विवेक तन्खा ने शुक्रवार को यहां आयोजित पत्रकारवार्ता में कहा कि केंद्र की वर्तमान सरकार व सत्ताधारी दल द्वारा संविधान के मूल आधार को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। देश में अजीब सा भय है, जो आजादी के बाद 71 सालों में कभी नहीं रहा। देश की सत्ता तानाशाही प्रवृत्ति के हाथों में है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति से देश को उबारने के लिए मंथन हेतु यह आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में 10 हजार वकील कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करेंगे। यह बदलाव का एक बड़ा इशारा है।

आ रहे ये दिग्गज
बताया गया है कि शनिवार 21 अपै्रल को सुबह 10. 30 बजे से यहां मदनमहल, दद्दा परिसर पर आयोजित कांग्रेस लीगल सेल के विधिक विमर्श 2018 कार्यक्रम में देश के दिग्गज कांग्रेस नेता आ रहे हैं। इनमें कांग्रेस के नामी वकील व पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्ब्ल, अभिषेक मनु सिंघवी, सलमान खुर्शीद, कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, अरुण यादव सहित समेत कई हस्तियां शामिल हैं। कार्यक्रम के समन्वय की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर को दी गई है। क्या इस कार्यक्रम और जमावड़े को चुनावी राजनीति का शंखनाद माना जाए…? इस सवाल पर तन्खा ने मुस्कुराकर कहा कि इससे इंकार भी नहीं किया जा सकता। कांग्रेस लोगों के हित और हक के लिए सदा खड़ी है। भय के माहौल को खत्म किया जाना जरूरी है और अनुभवी पार्टी कांग्रेस ही यह कर सकती है।

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औऱ यहां खलबली
दस हजार वकीलों के कांग्रेस में शामिल होने की खबर से भाजपा में खलबली मच गई है। पार्टी के कई दिग्गज नेता गुप-चुप तरीके से डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। खबर है कि भाजपा ने अपने खेमे के वरिष्ठ अधिवक्ताओं के माध्यम से वकीलों को साधना शुरू कर दिया है। भाजपा के नगर अध्यक्ष जीएस ठाकुर स्वयं वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। माना जा रहा है कि उनके मार्गदर्शन में भी यह काम चल रहा है। इधर कांग्रेस नेता व पूर्व महाधिवक्ता विवेक तन्खा अपना खेमा बढ़ाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं। कांग्रेस के विधायक भी लगातार प्रदर्शन करके भाजपा पर हमला बोल रहे हैं। शुक्रवार को विधायक नीलेश अवस्थी ने ऊंट की सवारी के माध्यम से प्रदेश सरकार की कई अनियमितताओं पर प्रहार किया।

आखिर क्या है गणित

कांग्रेस की सक्रियता को लोग अपने नजरिए से देख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले डेढ़ दशक में महाकोशल और विंध्य में कांग्रेस को भारी क्षति हुई है। महाकोशल और विंध्य भाजपा के मजबूत गढ़ के रूप में उभरे हैं। भाजपा के बहुमत में कांग्रेस को अपनी जमीन सरकती हुई दिखाई दे रही है। यही वजह है कि दिग्गज नेता अब इस किले को तोडऩे के लिए जुगत लगा रहे हैं। इधर भाजपा किसी कीमत पर इस किले को खोना नहीं चाहती। भाजपा के दिग्गज भी अपने स्तर पर मोहपाश बिछा रहे हैं। सीएम की कई योजनाओं और ताबड़तोड़ घोषणाओं को इसी से जोडकऱ देखा जा रहा है। राजनीतिक कारण कुछ भी हों, लेकिन सांसद राकेश सिंह के हाथों में भाजपा प्रदेश संगठन की कमान को भी लोग इसी नजरिए से देख रहे हैं। पार्टी के पंडितों को कहीं न कहीं इस बात का भान है कि सांसद सिंह में कहीं न कहीं वो बात है, जो लोगों को उनसे जोड़ती है। लगातार तीन बार से सांसद पद पर कायम सिंह इस अग्नि परीक्षा से गुजरने तैयार भी दिख रहे हैं

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मोदी भी पहुंचेंगे महाकोशल
उल्लेखनीय है कि 23 अप्रैल को जबलपुर में राष्ट्रीय पंचायत का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें देशभर के नौ सौ से ज्यादा पंचायत प्रतिनिधि व पांच सौ से ज्यादा वीवीआईपी शामिल होंगे। आयोजन में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर शिरकत करेंगे। वहीं मंडला में आयोजित महासम्मेलन के लिए 24 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई राज्यों के मंत्रीयों का आगमन हो रहा है। पीएम मोदी कार्यक्रम में शामिल होने के बाद शाम को डुमना एयरपोर्ट वापस लौटेंगे और वापस दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे। बाकी प्रतिनिधियों की 25 अपै्रल को वापसी होगी। ये दोनों कार्यक्रम यूं तो सरकारी हैं, लेकिन इनमें भी राजनीति के जानकार अपने नजरिए से देख रहे हैं। इनका मानना है कि यह गणित कहीं ने कहीं डेमैज कंट्रोल और महाकोशल व विंध्य के जनाधार को थामने का है।

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