प्रदेश में किडनी ट्रांसप्लांट कराई तो सरकारी सहायता मिलेगी आधी

भोपाल। किडनी ट्रांसप्लांट, अस्पतालों में इलाज व ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया एक, चाहे इलाज प्रदेश में हो या प्रदेश के बाहर, लेकिन राज्य सरकार द्वारा राज्य बीमारी सहायता निधि के तहत मरीजों को मिलने वाली राशि में दोहरी नीति अपनाई जा रही है। जो मरीज प्रदेश के अस्पतालों में इलाज करवाता है उसे सरकार की तरफ से किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर सिर्फ दो लाख रुपए दिए जा रहे हैं। जबकि प्रदेश के बाहर इलाज करवाने पर यह राशि दोगुनी होकर 4 लाख रुपए हो जाती है।

राज्य के अंदर कम राशि मिलने पर कई बार मरीजों को अपनी जेब से रुपए लगाकर इलाज करवाना पड़ रहा है। गरीबी रेखा के नीचे के मरीजों (राज्य बीमारी सहायता निधि), सरकारी कर्मचारियों और उनके आश्रित सदस्यों और मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से इलाज कराने वालों को इस पैकेज के अंतर्गत राशि दी जाती है।

प्रदेश के निजी अस्पताल 2 लाख के पैकेज में इलाज को तैयार हो जाते हैं, लेकिन दूसरे अन्य खर्च के नाम पर मरीजों से अतिरिक्त राशि ली जाती है। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद फालोअप का खर्च भी मरीजों को उठाना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग के पास भी ऐसी शिकायतें पहुंची हैं। जांच में ये शिकायतें सही पाई गई हैं। उधर, दूसरे राज्यों में इलाज के लिए जाने वाले मरीजों को अपनी जेब से कुछ खर्च नहीं करना पड़ता।

प्रदेश में हर साल करीब 25 फीसदी की दर से किडनी ट्रांसप्लांट बढ़ा है, लेकिन पैकेज कम होने के चलते 80 से 90 फीसदी मरीज बाहर के अस्पतालों में जाकर इलाज करा रहे हैं। इनमें ज्यादातर राज्य बीमारी सहायता निधि के सहायता पाने वाले गरीब मरीज होते हैं।

ज्यादा पैसे लेने की आ चुकी हैं शिकायतें

मप्र तृतीय श्रेणी कर्मचारी संघ के महामंत्री लक्ष्मी नारायण शर्मा ने बताया पैकेज से ज्यादा राशि लेने की शिकायत कई अस्पतालों की आ चुकी है। इसमें इंदौर व भोपाल के अस्पताल भी शामिल हैं। ऐसे कई कर्मचारी हैं जिन्होंने पैकेज से ज्यादा राशि ली है। कुछ कर्मचारियों की शिकायत पर अस्पतालों पर कार्रवाई भी की गई है। दिक्कत यह है कि लोग शिकायत नहीं करते। इसका सबसे अच्छा तरीका यह है कि सरकार बीमा के तहत इलाज कराए।

प्रदेश में यहां होता है किडनी ट्रांसप्लांट

– चोइथराम अस्पताल इंदौर

– सिनर्जी अस्पताल इंदौर

-बांबे अस्पताल इंदौर

– ग्रेटर कैलाश अस्पताल इंदौर

– सिटी हास्पिटल जबलपुर

– चिरायु मेडिकल कॉलेज भोपाल

– बंसल अस्पताल भोपाल

– सिध्यांता रेडक्रास अस्पताल भोपाल

इस तरह चिन्हित किए जाते हैं अस्पताल

– किडनी ट्रांसप्लांट के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग से मान्यता

– एनएबीएच सर्टिफिकेट

– मान्यता के लिए बनी कमेटी की सहमति

इनका कहना है

प्रदेश के बाहर के अस्पतालों को चिकित्सा शिक्षा विभाग ने चिन्हित किया है। उनकी राशि 4 लाख है। प्रदेश के भीतर के अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग चिन्हित करता है। उनके लिए पैकेज 2 लाख है। राज्य के अस्पतालों के लिए राशि बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। जल्द ही इस पर निर्णय होना है।

डॉ. केएल साहू संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं

सरकार अगर बहुत कम पैकेज देती है तो निजी अस्पताल सरकारी योजनाओं के तहत कैसे काम कर पाएंगे।

आम मरीजों से जो खर्च लिया जाता है उससे थोड़ा कम हो सकता है, पर आधे पैसे में कैसे काम इलाज होगा।

डॉ. एएस सोइन लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन मेदांता अस्पताल

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