मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर संकट, LS-RS कल तक स्थगित

नई दिल्ली। मोदी सरकार के खिलाफ मंगलवार को फिर संसद में अविश्‍वास प्रस्‍ताव पेश किए जाने की कोशिश पर पानी फिरता नजर आ रहा है। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही ‘वी वांट जस्टिस’ के नारे लगाए जाने लगे। इसके बाद सदन की कार्यवाही को 12 बजे तक के लिए स्‍थगित करना पड़ा। दोबारा कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दल फिर से हंगामा करने लगे, जिसके बाद लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया। इससे पहले राज्यसभा की कार्यवाही भी लगातार हंगामे की वजह से कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

वाईएसआर कांग्रेस और तेगुगू देशम पार्टी (टीडीपी) जैसी पार्टियां आज भी लोकसभा में अविश्‍वास प्रस्‍ताव पेश करने की कोशिश में हैं। आंध्र प्रदेश को विशेष राज्‍य का दर्जा नहीं दिए जाने से नाराज दोनों पार्टियां ये कदम उठा रही हैं और कई विपक्षी पार्टियां इनके समर्थन में हैं।

इस मांग को लेकर टीडीपी लगातार संसद में प्रदर्शन भी कर रही है। पार्टी सांसद थोटा नरसिम्‍हम ने मंगलवार को क‍हा कि जब तक हमारी मांग पूरी नहीं हो जाती, तब हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा। वहीं कावेरी मुद्दे को लेकर एआईएडीएमके सांसदों का भी संसद में प्रदर्शन चल रहा है।

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इससे पहले सोमवार को विपक्षी दलों के हंगामे के कारण 11वें दिन भी लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी और केंद्र सरकार के खिलाफ तेलुगुदेशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।

इस बीच, सरकार ने अपने बहुमत का भरोसा जता दिया है। कहा है कि अगर अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा में पेश भी हुआ तो वह उसे आसानी से परास्त कर देगी। 539 सदस्यों वाली लोकसभा में भाजपा के पास खुद के 274 सदस्य हैं, जबकि बहुमत के लिए 270 सदस्यों की ही जरूरत है।

केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री अनंत कुमार ने कहा है कि हम अविश्‍वास प्रस्‍ताव का सामना करने को तैयार हैं, क्‍योंकि सदन में हमारा समर्थन है।

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गौरतलब है कि टीडीपी के लोकसभा में 16 सदस्य हैं, जबकि वाईएसआर कांग्रेस के नौ सदस्य हैं। दोनों दल विपक्षी पार्टियों से अपने-अपने नोटिस के समर्थन के लिए लामबंद करने में जुटे हुए हैं। सदन में अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए किसी भी नोटिस को कम से कम 50 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है। कांग्रेस समेत अन्य दलों को मिलाकर यह संख्या 150 तक पहुंच गई है।

आंध्र प्रदेश की दोनों पार्टियों ने इस संबंध में नोटिस दे रखा था। राज्‍य को विशेष राज्‍य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ यह कदम उठाया जा रहा है।

इससे पहले टीडीपी सांसद आरएम नायडू ने कहा था कि हम संसद में अविश्‍वास प्रस्‍ताव पेश करने जा रहे हैं। सभी पार्टियों की जिम्‍मेदारी है कि वे हमारा समर्थन करें। ज्‍यादा से ज्‍यादा समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि बहस हो सके। सरकार की गिराने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।

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वाईएसआरसीपी सांसद वीएएस रेड्डी ने कहा था कि हम आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद पिछले चार साल से विशेष राज्‍य के दर्जे के लिए लड़ रहे हैं। 2016 तक भाजपा और चंद्रबाबू नायडू कहते रहे हैं कि विशेष राज्‍य का दर्जा दिया जाएगा। इसके अचानक उन्‍होंने भाजपा से हाथ मिला लिया। वह एक गिरगिट की तरह हैं, उन्‍होंने राज्‍य के खिलाफ फैसला लिया

वहीं टीडीपी और वाईएसआरसीपी के अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर आंध्र प्रदेश भाजपा प्रमुख के हरिबाबू ने कहा था कि भाजपा के पास लोकसभा में पूर्ण बहुमत है। ये सभी पार्टियों एक साथ होकर भी मोदी सरकार को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकती हैं।

शिवसेना से संजय राउत ने कहा था कि हम इंतजार करेंगे और देखेंगे। हमें देखना होगा कि अविश्वास प्रस्ताव को स्पीकर की अनुमति मिलती है या नहीं। अविश्वास प्रस्ताव पर हमने कोई फैसला नहीं किया है, इस बारे में उद्धव जी फैसला करेंगे।

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