GST Council Meeting: छोटे व्यापारियों को मिल सकती है यह बड़ी राहत

नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल की आज (6 अक्टूबर) नई दिल्ली में होनेवाली बैठक में इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विस टैक्स रिफंड पर फैसला लिया जा सकता है। इसके साथ ही काउंसिल डेढ़ करोड़ रुपए तक के सालाना टर्नओवर वाले व्यवसायियों को हर माह जीएसटी के भुगतान और मासिक रिटर्न फाइल करने से छूट दे सकती है।

जीएसटी काउंसिल की 22वीं बैठक शुक्रवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में यहां हो रही है। यह काउंसिल जीएसटी के बारे में नीतिगत फैसले लेने वाली सर्वोच्च संस्था है। जीएसटी काउंसिल की यह बैठक प्रस्तावित समय से 18 दिन पहले हो रही है। पहले यह बैठक 24 अक्टूबर को होनी थी।

सुशील मोदी ने जीएसटी नेटवर्क पर आयोजित अपनी दूसरी बैठक के बाद पत्रकारों से कहा था कि शुक्रवार को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में इंटीग्रेटेड जीएसटी रिफंड और छोटे करदाताओं के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर अहम फैसला लिया जा सकता है। इस मंत्रिसमूह की पहली बैठक 16 सितंबर को आयोजित हुई थी।

बिहार के उपमुख्यमंत्री के नेतृत्व वाले पांच सदस्यीय मंत्रिसमूह का गठन जीएसटी नेटवर्क पर तकनीकी खामियों की देखरेख के लिए किया गया है। साथ ही उनको यह जिम्मा भी दिया गया है कि वो सभी हितधारकों और इसके वेंडर (वैश्विक सॉफ्टवेयर दिग्गज इंफोसिस) को उचित परामर्श भी प्रदान करे।

सुशील मोदी ने कहा कि जीएसटी शासन में आए संरचनात्मक परिवर्तनों के बारे में काउंसिल की अगली बैठक में काउंसिल के सदस्यों के साथ विचार विमर्श किया जाएगा और इसकी घोषणा केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली करेंगे। आईटी संबंधी तमाम खामियों को लगभग दूर कर लिया गया है और व्यापारी वर्ग ऑनलाइन माध्यम से रिटर्न फाइलिंग के दौरान नेटवर्क के काफी सहज होने का अनुभव प्राप्त कर रहे हैं।

छोटे कारोबारियों को हो सकता है यह फायदा –

ऐसा होने पर इन कारोबारियों को तीन महीने में एक बार जीएसटी का भुगतान करके रिटर्न तिमाही दाखिल करना होगा। साथ ही काउंसिल कंपोजीशन स्कीम की मौजूदा 75 लाख रुपए सालाना टर्नओवर की सीमा को बढ़ाकर एक करोड़ रुपए कर सकती है।

सूत्रों के मुताबिक जीएसटी के अनुपालन में छोटे कारोबारियों को राहत देना काउंसिल के एजेंडा में सबसे ऊपर है। काउंसिल कंपोजीशन स्कीम की मौजूदा कारोबारी सीमा सालाना 75 लाख रुपए को बढ़ाकर एक करोड़ रुपए कर सकती है।

दरअसल कंपोजीशन स्कीम के तहत पंजीकृत व्यापारियों को एक प्रतिशत, मैन्यूफैक्चरर को दो प्रतिशत और रेस्टोरेंट सेवा देने वालों को पांच प्रतिशत की दर से जीएसटी का भुगतान करना होता है। उन्हें जीएसटी का मासिक भुगतान और रिटर्न भी हर माह दाखिल नहीं करना पड़ता। हालांकि ये व्यापारी टैक्स इन्वॉइस जारी नहीं कर सकते है इसलिए वे इनपुट पर दिए गए टैक्स का क्रेडिट प्राप्त नहीं कर सकते हैं।

सूत्रों ने कहा कि कंपोजीशन स्कीम के साथ-साथ डेढ़ करोड़ रुपए तक सालाना टर्नओवर वाले कारोबारियों को जीएसटी का हर माह भुगतान और रिटर्न दाखिल करने छूट भी दी जा सकती है। ऐसा होने पर ये कारोबारी प्रत्येक तिमाही पर रिटर्न दाखिल कर सकेंगे और जीएसटी का भुगतान कर सकेंगे।

सूत्रों ने कहा कि काउंसिल सीजीएसटी कानून की धारा 9 (4) के प्रावधानों को चालू वित्त वर्ष के अंत तक निलंबित रखने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हो सकती है। दरअसल इस धारा के तहत यह प्रावधान किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति या कंपनी किसी गैर-पंजीकृत व्यक्ति से ऐसी वस्तु या सेवा खरीदता है जिस पर जीएसटी देय है तो जीएसटी भरने की जिम्मेदारी जीएसटी में पंजीकृत व्यापारी पर होगी। सूत्रों ने कहा कि काउंसिल इस बात पर भी चर्चा करेगी कि ई-वे बिल को राष्ट्रव्यापी स्तर पर कब से क्रियान्वित किया जाए।

काउंसिल की यह बैठक ऐसे समय हो रही है जबकि एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जीएसटी लागू हुए तीन माह हुए हैं और इसके क्रियान्वयन की समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यापारियों को जो दिक्कतें हो रही हैं उन्हें दूर करने के उपाय भी जीएसटी काउंसिल की बैठक में होने चाहिए।

सूत्रों ने कहा कि जीएसटी काउंसिल निर्यातकों को राहत देने के लिए भी कुछ उपाय कर सकती है। काउंसिल की हैदराबाद में हुई बैठक में निर्यातकों की समस्याओं पर विचार करने के लिए अधिकारियों की एक समिति बनाने का निर्णय किया गया था। इसके बाद वित्त मंत्री ने राजस्व सचिव हसमुख अढिया के नेतृत्व में यह समिति गठित की थी। काउंसिल समिति की सिफारिशों के आधार पर निर्यातकों के लिए राहत के प्रस्तावों का फैसला करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *