नोटबंदी और जीएसटी के सवालों पर मोदी का करारा जवाब 

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था में सुस्ती के विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब दिया है। मोदी ने कहा है कि अर्थव्यवस्था के आधार मजबूत हैं। उनकी सरकार वित्तीय स्थिरता कायम रखकर निवेश बढ़ाने के कदम उठाती रहेगी जिससे आने वाले वर्षों में देश विकास की नई लीग में होगा।

सरकार एमएसएमई और असंगठित क्षेत्र सहित उन क्षेत्रों के प्रति सजग है जिन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब ईमानदारी को ही प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि प्रधानमंत्री ने जीएसटी अपनाने वाले व्यापारियों को आश्वस्त किया कि उनके पुराने रिकॉर्ड नहीं खंगाले जाएंगे। साथ ही जीएसटी के क्रियान्वयन की समीक्षा कर आवश्यकता पड़ने पर जरूरी बदलाव भी किए जाएंगे।

प्रधानमंत्री ने बुधवार को इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेट्रीज ऑफ इंडिया की स्वर्ण जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। पीएम का यह बयान ऐसे समय आया है जब चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में देश की विकास दर घटकर 5.7 प्रतिशत पर आने के बाद विपक्षी दलों के साथ-साथ भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने राजग सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।

प्रधानमंत्री ने एक घंटे से अधिक के अपने भाषण में आंकड़ों और पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन के सहारे आलोचकों को बिन्दुवार जवाब दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कई पैरामीटर हैं जो देश की अर्थव्यवसथा की मजबूत स्थिति, सरकार की निर्णय शक्ति और विकास की दिशा और गति का सबूत देते हैं।

पीएम ने कहा कि आलोचकों की हर बात खराब होती है ऐसा सरकार नहीं मानती लेकिन हमें देश में निराशा का माहौल पैदा करने से बचना चाहिए। प्रधानमंत्री ने आलोचकों की तुलना “महाभारत” के शल्य से करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने बीते तीन साल में बीमा सहित जिन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जो सुधार किए हैं वे शल्य प्रवृत्ति के लोगों को नजर नहीं आते। शल्य प्रवृत्ति के लोगों को अब अब पहचानने की जरूरत है। जब आंकड़े अनुकूल होते हैं तो उन्हें इन लोगों को संस्था और प्रक्रिया सही लगती हैं लेकिन जैसे ही ये आंकड़े उनकी कल्पना के विपरीत होते हैं तो ये कहते हैं कि यह संस्था ठीक नहीं हैं और आंकड़े ठीक नहीं हैं।

प्रधानमंत्री ने सवाल किया कि क्या ऐसा पहली बार हुआ है जब देश के जीडीपी की वृद्धि किसी तिमाही में 5.7 प्रतिशत पर पहुंची है। पीएम ने कहा कि पिछली सरकार में छह साल में आठ बार ऐसे मौके आए जब विकास दर 5.7 प्रतिशत या उससे नीचे गिरी थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था ने ऐसी तिमाही भी देखी हैं जब विकास दर 0.2 प्रतिशत और 1.5 प्रतिशत थी और उस समय भारत की मुद्रास्फीति और चालू खाते का घाटा भी अधिक था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब इसी सीएसओ (केंद्रीय सांख्यकीय संगठन) ने इस सरकार के दौरान 7.4 प्रतिशत वृद्धि के आंकड़े जारी किए तो इन्हीं लोगों ने इसे खारिज कर दिया था। उस समय उनका कहना था कि जमीनी हकीकत में यह महसूस नहीं होता है लेकिन जैसे ही 5.6 प्रतिशत हुई तो उन्हें मजा आ गया।

प्रधानमंत्री पूर्ववर्ती यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उसके कार्यकाल में अर्थव्यवस्था की स्थिति इतनी नाजुक थी कि भारत को “फ्रेजाइल फाइव” ग्रुप का सदस्य कहा जाता था। प्रधानमंत्री ने कहा कि उस समय बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों के रहते ऐसा कैसे हो गया। उस समय हमारे देश में जीडीपी से ज्यादा महंगाई की दर थी और बढ़ते राजकोषीय घाटे तथा बेकाबू चालू खाते के घाटे पर ही चर्चा होती थी। उस समय देश के विकास को विपरीत दिशा में ले जाने वाले ये सभी पैरामीटर कुछ लोगों को पसंद आते थे। अब जबकि ये सभी पैरामीटर सुधरे हैं तो कुछ लोगों ने आंखों पर परदा डाल दिया है। लेकिन हम अपने वर्तमान के लिए देश के भविष्य को दांव पर नहीं लगा सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार जीएसटी के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी और जो भी बदलाव करने की आवश्यकता होगी उस पर विचार किया जाएगा। उन्होंने व्यापारियों को भरोसा दिलाया यह सरकार उनके साथ है। उन्होंने आर्थिक सुस्ती के आरोपों को नकारते हुए कहा कि जून के बाद पैसेंजर कार की बिक्री में 12 प्रतिशत, कॉमर्शियल गाड़ियों की बिक्री में 23 प्रतिशत, दोपहिया वाहनों की बिक्री में 54 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

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