इस दिवाली पर सस्ते लोन की उम्मीद नहीं, घोषणा आज

मुंबई. मौद्रिक नीति की समीक्षा के लिए दो दिन तक चलने वाली रिजर्व बैंक की बैठक का बुधवार को दूसरा दिन है। सरकार के साथ-साथ उद्योग जगत भी नीतिगत ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कर रहा है, लेकिन ऐसा होने की गुंजाइश कम है।

आरबीआई के गवर्नर ऊर्जित पटेल की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) किसी भी निर्णय तक पहुंचने से पहले अर्थव्यवस्था की जरूरतों और महंगाई की स्थिति पर गौर करेगा।

वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में आर्थिक विकास दर घटकर 3 साल के निचले स्तर 5.7 फीसदी पर आने के कारण ब्याज दरें घटाने का दबाव है। लेकिन, चूंकि महंगाई भी बढ़ती जा रही है, लिहाजा ऐसा होने के आसार कम हैं।

ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि रिजर्व बैंक ब्याज दरों के मोर्चे पर यथास्थिति कायम रखेगा। हालांकि वित्त मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने पिछले हफ्ते कहा था कि खुदरा कीमतों के हिसाब से महंगाई दर फिलहाल निचले स्तर पर है। इस वजह से केंद्रीय बैंक अगली मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरें घटा सकता है।

किसकी कैसी राय

एसोचैमः इस उद्योग मंडल ने एमपीसी को पत्र लिखकर कहा है कि ब्याज दरों में कम से कम 0.25 फीसदी कटौती की जानी चाहिए, क्योंकि उभरती चुनौतियों की वजह से अर्थव्यवस्था को तत्काल राहत की जरूरत है।

नीति आयोगः नीति अयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने उम्मीद जताई है कि रिजर्व बैंक नीतिगत दरें घटाएगा। उन्होंने इसकी दो वजहें गिनाई हैं, पेट्रोलियम उत्पादों के दाम स्थिर हो रहे हैं और खाने-पीने की चीजों की महंगाई घटने की संभावना है।

सुरजीत भल्लाः इस मशहूर अर्थशास्त्री का कहना है कि सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था का एक ही इलाज कम ब्याज दरें हैं। उनकी सलाह है कि रिजर्व बैंक को नीतिगत दरों में 1 फीसदी की एकमुश्त कटौती करनी चाहिए।

एसबीआईः देश के सबसे बड़े बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि मौजूदा हालात में नीतिगत दरों के मामले में राहत की उम्मीद कम है। तगड़ी संभावना है कि केंद्रीय बैंक नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।

मॉर्गन स्टेनलीः कंपनी के एक रिसर्च नोट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। ब्याज दरें कम करने की स्थिति में महंगाई बढ़ने का जोखिम रहेगा और रिजर्व बैंक ऐसा नहीं चाहेगा।

एचडीएफसी बैंकः निजी क्षेत्र के इस दिग्गज बैंक ने उम्मीद जताई है कि आरबीआई यथास्थिति बनाए रखेगा। इसके मुताबिक कम से कम अक्टूबर में तो ब्याज दरों में कटौती की कोई गुंजाइश नहीं है।

एडीबीः एशियाई विकास बैंक का मानना है कि आरबीआई नीतिगत दरों में कटौती का अगला राउंड शुरू तो करेगा, लेकिन अभी नहीं। यह सिलसिला इसी वित्त के आखिरी महीनों में शुरू होगा।

डीबीएसः रिजर्व बैंक पर दरें घटाने का दबाव तो है, लेकिन फिलहाल ऐसा होने की संभावना कम है। खास तौर पर इस नजरिए से कि महंगाई बढ़ने का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो गया है। मौजूदा वित्त वर्ष की बाकी अवधि में यह 4.5 फीसदी तक पहुंच सकता है।

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